अंतरराष्ट्रीय

बांग्लादेश में आरक्षण की लड़ाई शेख़ हसीना को हटाने पर कैसे आई बात

बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन में रविवार को हुई हिंसा में कम से कम 90 लोगों की मौत हो गई.

स्टूडेंट एक्टिविस्ट की ओर से बुलाए गए ‘पूर्ण असहयोग आंदोलन’ के दौरान ढाका समेत देश के कई हिस्से में हिंसा फैल गई.

सिराजगंज में सबसे अधिक लोग हताहत हुए हैं. अधिकारियों ने यहां कम से कम 18 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जिसमें 13 पुलिसकर्मी शामिल हैं.

रविवार की शाम तक सरकार समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच कई जगहों पर झड़प हुई.
शुरुआत में ये प्रदर्शन आरक्षण को लेकर थे, लेकिन अब इन्होंने सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले लिया है.

छात्र नेताओं ने प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के इस्तीफ़े की मांग को लेकर सविनय अवज्ञा आंदोलन की घोषणा की है.

विरोध कर रहे छात्रों के ग्रुप ने नागरिकों से टैक्स या अन्य बिल अदा न करने की अपील की है.

छात्रों ने सभी फ़ैक्ट्रियों और सार्वजनिक परिवहन को बंद किए जाने का भी आह्वान किया है.

बांग्लादेश

सरकार विरोधी आंदोलन

प्रदर्शनकारी अब साफ़ तौर पर सरकार बदलने का आह्वान कर रहे हैं.

शनिवार को ढाका में हज़ारों लोगों की भीड़ के सामने छात्र नेताओं में से एक नाहिद इस्लाम ने कहा, “शेख़ हसीना को केवल इस्तीफ़ा ही नहीं देना चाहिए, बल्कि उनके ख़िलाफ़ हत्याओं, लूट और भ्रष्टाचार के लिए मुकदमा चलाना चाहिए.”

इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने छह अगस्त को ‘ढाका तक ‘लॉन्ग मार्च’ करने की बात कही.

इसके लिए उन्होंने सभी लोगों से इस कार्यक्रम के लिए ढाका आने को कहा.

यह रैली ढाका में दोपहर दो बजे आयोजित होनी थी. हालांकि इसके बाद इस लॉन्ग मार्च को एक दिन पहले, यानी पांच अगस्त को करने की घोषणा कर दी गई.

ढाका में कर्फ़्यू लगा दिया गया है और रविवार रात से ही ढाका में प्रदर्शनकारी इकट्ठा होने लगेंगे जिससे कर्फ़्यू के बीच हिंसक झड़प की आशंका बढ़ गई है.

Related Articles

Back to top button