
निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क (डीएफ हिंदी)
हापुड़ में आयोजित व्यापारियों की एक बड़ी सभा में जहां विनीत अग्रवाल शारदा ने सरकार की नीतियों को व्यापारी हितैषी बताया, वहीं उनके दावों ने कई नए सवाल भी खड़े कर दिए। सभा में व्यापारियों की भारी मौजूदगी के बीच उत्तर प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का जोरदार बखान किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यापारियों की वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा सीमित ही नजर आई।
अपने संबोधन में विनीत शारदा ने खाद्य विभाग के लाइसेंस को आजीवन मान्य किए जाने और शुल्क सीमा को 12 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये करने को बड़ी राहत बताया। हालांकि छोटे और मध्यम व्यापारियों का एक वर्ग अब भी जीएसटी, महंगाई और बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जिस पर मंच से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।
उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार के नौ वर्षों को “सुशासन और विकास का स्वर्णिम काल” बताया, लेकिन विपक्ष और कुछ व्यापारिक संगठनों का मानना है कि विकास के दावों के बीच कई क्षेत्रों में असमानता और आर्थिक दबाव भी बढ़ा है।
सभा के दौरान कानून-व्यवस्था में सुधार के दावों को भी प्रमुखता दी गई, जहां अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उल्लेख किया गया। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयानों में अक्सर जमीनी हकीकत की जटिलताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
सबसे ज्यादा चर्चा नववर्ष पर मांस की दुकानों को बंद रखने की मांग को लेकर रही। इस प्रस्ताव ने व्यापारिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक भावनाओं के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई व्यापारियों का मानना है कि ऐसे फैसले से एक वर्ग के कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता है।
सभा में अन्य नेताओं ने भी सरकार की नीतियों की सराहना की, लेकिन कुल मिलाकर यह आयोजन अधिकतर राजनीतिक समर्थन और सरकारी छवि को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा गया, बजाय व्यापारियों की जमीनी समस्याओं के समाधान के।


