“भारत टैक्सी” बनाम प्राइवेट एग्रीगेटर्स—सहकारी मॉडल की राह में बड़ी चुनौतियां
4.31 लाख ड्राइवर जुड़े, लेकिन डिजिटल बाधाएं और बाजार प्रतिस्पर्धा से जूझता प्लेटफॉर्म

| निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
सरकार की महत्वाकांक्षी सहकारी पहल “भारत टैक्सी” को जहां एक वैकल्पिक राइड-हेलिंग मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है, वहीं इसकी जमीनी चुनौतियां भी तेजी से सामने आ रही हैं। सहकारिता मंत्रालय के तहत शुरू किया गया यह प्लेटफॉर्म निजी एग्रीगेटर्स को टक्कर देने का दावा करता है, लेकिन प्रतिस्पर्धा और डिजिटल बाधाएं इसकी राह में बड़ी अड़चन बनती दिख रही हैं।
अमित शाह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 6 जून 2025 को स्थापित और 5 फरवरी 2026 को लॉन्च हुआ “भारत टैक्सी” देश का पहला सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है। 23 मार्च 2026 तक इसमें 4.31 लाख ड्राइवर-भागीदार जुड़ चुके हैं, लेकिन यह आंकड़ा अभी भी बड़े निजी प्लेटफॉर्म्स की तुलना में सीमित प्रभाव दर्शाता है।
यह प्लेटफॉर्म शून्य-कमीशन और सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल पर काम करता है, जिससे ड्राइवरों को अधिक आय का दावा किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मजबूत बाजार पकड़ और तकनीकी दक्षता के, यह मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ साबित होगा या नहीं—यह सवाल बना हुआ है।
वर्तमान में सेवाएं दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के कुछ शहरों तक सीमित हैं, जबकि लखनऊ और चंडीगढ़ में विस्तार की तैयारी चल रही है। लेकिन टियर-2 और टियर-3 शहरों में विस्तार की योजना के बावजूद, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी अपनाने की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इसके अलावा, स्थापित निजी एग्रीगेटर्स के मजबूत नेटवर्क और ग्राहक आधार के बीच जगह बनाना आसान नहीं होगा। सहकारी मॉडल का उद्देश्य भले ही ड्राइवरों को सशक्त बनाना हो, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह उपयोगकर्ता अनुभव, भरोसे और प्रतिस्पर्धात्मक कीमतों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल “भारत टैक्सी” एक महत्वाकांक्षी प्रयोग जरूर है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता आने वाले समय में ही तय होगी।



