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भारत के हल्के टैंक ने गोलेबारी का परीक्षण सफलतापूर्वक किया पूरा

नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी हल्के टैंक ने 4,200 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर विभिन्न दूरियों से सटीकता के साथ लगातार कई राउंड गोलाबारी करके एक ‘‘बड़ी उपलब्धि’’ हासिल की है। रक्षा मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

यह हल्का टैंक विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उद्देश्य उन स्थानों पर तैनात सैनिकों को मजबूती प्रदान करना है जहां भारी टैंक संचालित नहीं हो सकते। इस हल्के टैंक को भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है, और इसका परीक्षण भारत के विभिन्न सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में किया गया।

चीन के साथ लगती सीमा पर सेना की लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बहुमुखी 25 टन श्रेणी के भारतीय हल्के टैंक को विकसित किया गया है।

इससे पहले सितंबर में टैंक का परीक्षण किया गया था। टैंक ने सितंबर में असाधारण प्रदर्शन करते हुए रेगिस्तानी इलाके में आयोजित क्षेत्रीय परीक्षणों के दौरान सभी इच्छित उद्देश्यों को कुशलतापूर्वक पूरा किया था।

मंत्रालय ने बताया कि भारतीय सेना 350 से अधिक हल्के टैंक की तैनाती पर विचार कर रही है, जिनमें से अधिकतर को पहाड़ी सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।

इस परीक्षण में हल्के टैंक ने अपनी उच्च मारक क्षमता, गतिशीलता और गोलेबारी में सटीकता साबित की। परीक्षण के दौरान टैंक ने विभिन्न प्रकार के गोले दागे, जो भारतीय सेना की वर्तमान और भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

इस सफलता से यह संकेत मिलता है कि भारत अब अपनी सुरक्षा के लिए हल्के, लेकिन प्रभावी टैंक तकनीकों में आत्मनिर्भर हो सकता है, और यह सेना को तेज, सटीक और उच्चतम स्तर की मारक क्षमता प्रदान करेगा।

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