राष्ट्रीय

झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन का निधन

योगी और मोदी ने जताया शोक | आदिवासी नेतृत्व के एक युग का अंत

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे और लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें डेढ़ महीने पहले स्ट्रोक भी आया था और पिछले एक महीने से वह जीवन रक्षक प्रणाली पर थे। दिल्ली के श्री गंगाराम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

शिबू सोरेन को झारखंड में ‘दिशोम गुरुजी’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने आदिवासी अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया और 38 वर्षों तक झामुमो का नेतृत्व करते हुए पार्टी को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वे झारखंड के तीसरे मुख्यमंत्री रहे और अपने चार दशकों के राजनीतिक जीवन में आठ बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा सांसद चुने गए।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “श्री शिबू सोरेन जी एक जमीनी नेता थे, जो आदिवासी समुदायों, गरीबों और दलितों को सशक्त बनाने के लिए भावुक थे। उनके निधन से दुख हुआ। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। मैंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से बात कर संवेदना व्यक्त की है।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिबू सोरेन जी का निधन अत्यंत दुःखद है। उन्होंने अपना जीवन आदिवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि उन्हें मोक्ष प्राप्त हो और परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति मिले।” भाजपा के वरिष्ठ नेता और झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि शिबू सोरेन का जाना झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अपने पिता के निधन की पुष्टि करते हुए लिखा, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सबको छोड़कर चले गए हैं। आज मैं बहुत दुखी हूं।”

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