उत्तर प्रदेश

कानपुर: गंगा में गिरने वाले 14 नालों की टैपिंग के लिए 138.11 करोड़ स्वीकृत

कानपुर में गंगा और पांडु नदियों को प्रदूषण से मुक्त करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। गंगा में गिरने वाले 14 अनटैप्ड नालों को बंद करने के लिए केंद्र सरकार ने 138.11 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस धनराशि से अब इंटरसेप्शन और डायवर्जन (I&D) कार्य के लिए जल निगम द्वारा निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कानपुर में कुल 33 नाले हैं, जिनमें 27 नगर क्षेत्र में और 6 बिटूर में स्थित हैं। इनमें से गंगा नदी से जुड़े 18 नालों में 11 टैप्ड, 6 अनटैप्ड और 1 बरसाती नाला है। वहीं, पांडु नदी के 9 नालों में 4 टैप्ड, 3 अनटैप्ड और 2 आंशिक टैप्ड हैं। इन अनटैप्ड नालों से सीधा गंदा पानी नदियों में गिरता है, जिससे गंगा और पांडु दोनों नदियां प्रदूषित हो रही हैं।

फिलहाल नगर निगम द्वारा बायोरिमेडिएशन तकनीक से सीवेज का आंशिक शोधन कराया जा रहा है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। जल निगम ने पहले ही डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर 152.02 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च का प्रस्ताव भेजा था, जिसमें से अब 138 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। जल निगम के अधिकारियों के अनुसार, यदि प्रक्रिया समयबद्ध रही तो अगले दो वर्षों में सभी अनटैप्ड नालों को टैप कर दिया जाएगा। प्रमुख अनटैप नालों में रानीघाट, गोलाघाट, सतीचौरा, मदारपुर, किशनपुर और डब्का नाला शामिल हैं। वहीं, परमिया और गुप्तारघाट नाले आंशिक टैप्ड हैं, जिनसे ओवरफ्लो होकर सीवेज गंगा में मिल रहा है।

यह परियोजना कानपुर की जलस्वच्छता और गंगा संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

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