धर्म

महाकुंभ 2025: प्रयागराज में कब होगा शुरू, जानें ग्रह-राशियों के योग का महत्व

Prayagraj: साल 2025 का महाकुंभ प्रयागराज में आयोजित होगा, और इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। महाकुंभ एक धार्मिक, सांस्कृतिक, और आध्यात्मिक मेला है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है। यह मेला हर 12 साल में एक बार होता है और इसके आयोजन के पीछे ग्रहों और राशियों का विशेष योग होता है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा, और बृहस्पति की अहम भूमिका होती है।
महाकुंभ का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
महाकुंभ का आयोजन चार प्रमुख स्थानों पर होता है—प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, और उज्जैन। इनमें से प्रयागराज का कुंभ सबसे महत्वपूर्ण और विशाल माना जाता है। कुंभ पर्व कब और कहां होगा, इसका निर्धारण ग्रह-राशियों के संयोग से किया जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य और बृहस्पति एक विशेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन होता है।
शास्त्रों में कहा गया है:
“सूर्येन्दुगुरु संयोगस्तद्राशौ यत्र वत्सरे। सुधा सुंभ प्लवे भूमो कुंभो भवतिनान्यथा।।”
इस श्लोक का अर्थ है कि जब सूर्य, चंद्रमा, और बृहस्पति एक विशेष राशि में होते हैं, तभी कुंभ मेले का आयोजन संभव होता है।
महाकुंभ 2025: तिथियों और योगों का निर्धारण
साल 2025 में महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी को **पौष पूर्णिमा** के दिन पवित्र स्नान के साथ होगी। महाकुंभ का समापन 26 फरवरी 2025 को **महाशिवरात्रि** के अंतिम स्नान के साथ होगा। इस दौरान करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु गंगा में स्नान करेंगे, जिसे पवित्रता और मोक्ष की प्राप्ति के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
महाकुंभ 2025 स्नान की महत्वपूर्ण तिथियां:
पौष पूर्णिमा स्नान:** 13 जनवरी 2025
मकर संक्रांति स्नान:** 14 जनवरी 2025
मौनी अमावस्या स्नान:** 29 जनवरी 2025
बसंत पंचमी स्नान:** 3 फरवरी 2025
माघी पूर्णिमा स्नान:** 12 फरवरी 2025
महाशिवरात्रि स्नान:** 26 फरवरी 2025
महाकुंभ की विशेषता और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
महाकुंभ का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भी है। यह मेला एकता और समर्पण का प्रतीक है, जहां लाखों-करोड़ों लोग एकजुट होकर आस्था और विश्वास के साथ इस पवित्र आयोजन में भाग लेते हैं। महाकुंभ का आयोजन केवल चार स्थानों पर ही होता है क्योंकि अमृत बिंदु का पतन इन्हीं स्थानों पर हुआ था। शास्त्रों के अनुसार, देवताओं के 12 दिन और मनुष्यों के 12 साल के बीच केवल चार कुंभ पर्व धरती पर होते हैं, जबकि शेष 8 कुंभ देवताओं के लिए लोकांतर में होते हैं।
महाकुंभ 2025 की तैयारियां
प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार व्यापक तैयारियों में जुटी हुई हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ 2025 का लोगो भी अनावरण किया, जिससे इसके महत्व को दर्शाया गया। सुरक्षा, स्वच्छता, और आवागमन की सुविधाओं को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।
महाकुंभ 2025 एक अद्वितीय आयोजन होने जा रहा है, जिसमें ग्रह-राशियों का विशेष योग और धार्मिक महत्व शामिल है। यह मेला न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का भी एक अद्वितीय उदाहरण है।

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