मुंबई: महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। महा विकास आघाड़ी (MVA) की सीट बंटवारे को लेकर हो रही अहम बैठक में उस वक्त हलचल मच गई जब शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत बीच बैठक से ही बाहर निकल गए। उनके साथ शिवसेना UBT के सांसद अनिल देसाई भी बैठक छोड़कर रवाना हो गए, जबकि कांग्रेस और एनसीपी (SP) के नेता बैठक में बने रहे।
संजय राउत ने बाहर आकर संवाददाताओं से कहा कि “MVA में सब ठीक चल रहा है। कल हम प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे,” हालांकि उनकी अचानक बैठक छोड़ने से गठबंधन के भीतर मतभेदों की अटकलें तेज हो गई हैं। बता दें कि MVA के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं, जिस पर अभी भी अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
क्यों उठे सवाल?
बैठक के दौरान राउत और देसाई का बाहर निकलना कई सवाल खड़े कर रहा है। खासतौर पर तब जब महाराष्ट्र चुनावों की नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। क्या कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बीच तीखी बहस हुई थी? सूत्रों के अनुसार, MVA के घटक दलों के बीच उत्तर महाराष्ट्र, विदर्भ और मुंबई के कुछ प्रमुख सीटों पर सहमति नहीं बन पाई है।
किन सीटों पर फंसा है पेंच?
सूत्रों के मुताबिक, विदर्भ में दक्षिण नागपुर, रामटेक, चंद्रपुर, कामठी, भंडारा और अमरावती जैसी सीटों पर सहमति नहीं बनी है। वहीं, मुंबई में घाटकोपर वेस्ट, वर्सोवा, कुर्ला, बांद्रा पूर्व और उत्तर महाराष्ट्र में पारोला और नासिक पश्चिम जैसी सीटों पर विवाद बरकरार है। बताया जा रहा है कि शिवसेना UBT इन सीटों पर ज्यादा हिस्सेदारी की मांग कर रही है, जबकि कांग्रेस और एनसीपी अन्य क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं।
छोटी पार्टियों की चिंता
MVA में सीट बंटवारे की प्रक्रिया लंबी खिंचने से छोटी पार्टियों के नेताओं में भी चिंता बढ़ रही है। समाजवादी पार्टी और किसान वर्कर्स पार्टी जैसे दलों ने कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। नामांकन की अंतिम तिथि 29 अक्टूबर होने के कारण ये छोटी पार्टियां सीट आवंटन में देरी से प्रभावित हो सकती हैं।
क्या करेंगे उद्धव ठाकरे?
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट से उद्धव ठाकरे ने कहा था कि “आज ही मामला सुलझा लें, नहीं तो हम कल अपनी लिस्ट जारी कर देंगे।” अब यह देखना दिलचस्प होगा कि MVA के घटक दलों में सहमति बनती है या शिवसेना UBT अपनी लिस्ट जारी करती है।
आगे क्या होगा?
MVA की अगले दिन होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सबकी निगाहें हैं। देखना होगा कि गठबंधन के दलों के बीच सीटों का बंटवारा किस तरह होता है और क्या MVA के भीतर मतभेद सुलझ पाते हैं या नहीं।