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महाराष्ट्र: 6-1 फॉर्मूला से तय होगा मंत्रिमंडल का बंटवारा, BJP-शिवसेना-NCP को मिल सकते हैं कितने पद? जानें

 महाराष्ट्र में 5 दिसंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण होना है। महायुति (भाजपा, शिवसेना, एनसीपी) गठबंधन में मंत्रिमंडल के गठन और पदों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, गठबंधन में 6-1 का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है। यानी प्रत्येक छह विधायकों पर एक मंत्री पद आवंटित किया जाएगा। इससे भाजपा को सबसे अधिक मंत्री पद मिलने की संभावना है।
क्या है 6-1 फॉर्मूला?
इस फॉर्मूले के तहत, हर छह विधायकों के आधार पर मंत्री पदों का बंटवारा होगा। भाजपा, जिसने 132 सीटें जीती हैं, को 20-22 मंत्री पद मिल सकते हैं। शिवसेना (57 सीटें) को 12 और एनसीपी (41 सीटें) को 9-10 मंत्री पद मिलने की संभावना है। अन्य छोटे दलों को भी उनकी सीटों के अनुसार मंत्री पद दिए जा सकते हैं।
किसे मिल सकता है कौन सा पद?
  1. मुख्यमंत्री पद:
    • देवेंद्र फडणवीस (भाजपा) के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा जोरों पर है।
  2. डिप्टी मुख्यमंत्री पद:
    • शिवसेना के एकनाथ शिंदे और एनसीपी के अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाए जाने की संभावना है।
विभागों के बंटवारे में आ सकती है दिक्कत
  • शिवसेना और एनसीपी, दोनों ही महत्वपूर्ण मंत्रालयों की मांग कर रहे हैं।
  • शिवसेना ने गृह मंत्रालय की मांग की है, जो पहले देवेंद्र फडणवीस के पास था।
  • एनसीपी ने शिंदे गुट के बराबर सम्मान और मंत्रालयों की मांग की है। छगन भुजबल ने एनसीपी के बेहतर स्ट्राइक रेट का हवाला देते हुए कहा कि मंत्री पद इसी आधार पर मिलना चाहिए।
महायुति की ऐतिहासिक जीत
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति ने 288 सीटों में से 235 सीटों पर जीत दर्ज की:
  • भाजपा: 132 सीटें
  • शिवसेना (शिंदे गुट): 57 सीटें
  • एनसीपी (अजित पवार गुट): 41 सीटें
  • अन्य सहयोगी दलों ने 5 सीटें जीतीं।
महाविकास अघाड़ी को झटका
महायुति की इस जीत ने महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को बड़ा झटका दिया:
  • शिवसेना (उद्धव गुट): 20 सीटें
  • कांग्रेस: 16 सीटें
  • एनसीपी (शरद पवार गुट): 10 सीटें
सीएम पद पर सहमति के संकेत
शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद से दावेदारी छोड़ने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि “मेरे मन में सीएम बनने की लालसा नहीं है। जो भी फैसला भाजपा और महायुति की बैठक में लिया जाएगा, वह मुझे स्वीकार होगा।”
शपथग्रहण से पहले दलों के बीच मंत्रिमंडल के विभागों का बंटवारा मुख्य चुनौती है। गठबंधन के नेता इस फॉर्मूले के जरिए पदों का संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।

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