कानपुर

कानपुर में अवैध निर्माण पर बड़ा एक्शन: 11 बीघा क्षेत्र में ध्वस्तीकरण व सीलिंग, KDA का सख्त अभियान

निश्चय टाइम्स डेस्क।। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने अवैध निर्माण और अनाधिकृत प्लाटिंग के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए प्रवर्तन (जोन-1बी) के अंतर्गत शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। उपाध्यक्ष श्री मदन सिंह गब्र्याल एवं सचिव श्री अभय कुमार पाण्डेय के निर्देशन में 30 जनवरी 2026 को लगभग 11 बीघा क्षेत्रफल में फैले अवैध निर्माण और विकास कार्यों पर ध्वस्तीकरण एवं सीलिंग की कार्रवाई की गई।

यह अभियान विशेष कार्याधिकारी/उपजिलाधिकारी डॉ. रवि प्रताप सिंह के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय अवर अभियंता श्री श्रवण कुमार, श्री हिमांशु बर्नवाल, सुपरवाइजर श्री राम औतार, श्री मनोज, श्री राज कुमार, श्री लाल सिंह तथा थाना बिठूर का पर्याप्त पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा, जिससे कार्रवाई शांतिपूर्ण और प्रभावी ढंग से पूरी की जा सके।

08 बीघा में अवैध प्लाटिंग ध्वस्त

प्रवर्तन दल ने कटरी ख्यौरा, कानपुर में श्री महादेव तेजा, हरिश्चन्द्र, सुरेन्द्र पाल मेहरोत्रा एवं अन्य द्वारा विकसित की जा रही लगभग 08 बीघा की अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई की। बिना कानपुर विकास प्राधिकरण से तलपट मानचित्र स्वीकृत कराए और अनुज्ञा प्राप्त किए की जा रही इस प्लाटिंग के विरुद्ध 03 जेसीबी मशीनों के माध्यम से सड़क, नाला, बाउंड्री वॉल, बिजली के खंभे, पिलर, एंट्री गेट एवं अन्य सभी संरचनाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।

03 बीघा क्षेत्र सील

इसके अतिरिक्त आनन्देश्वर धाम सोसाइटी, सण्डीला, मन्धना, कानपुर नगर में स्थित लगभग 03 बीघा क्षेत्रफल के परिसर को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 28(क) के अंतर्गत सील किया गया। यह परिसर श्री शरद अग्रवाल एवं अन्य के स्वामित्व में था, जहां बिना स्वीकृति और अनुमति के निर्माण कार्य कराया गया था।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

डॉ. रवि प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि थाना नवाबगंज, कल्याणपुर एवं बिठूर क्षेत्र के अंतर्गत स्थित ग्रामों में लगभग 15 बीघा क्षेत्रफल की अवैध/अनाधिकृत प्लाटिंग और निर्माण को चिन्हित किया जा चुका है। इन पर शीघ्र ही ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की निरोधात्मक कार्रवाई भविष्य में भी सतत अभियान के रूप में जारी रहेगी, ताकि अवैध निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके और नियोजित शहरी विकास सुनिश्चित हो।

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