शिक्षा मंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच स्कूली शिक्षा में कोई खास सुधार नहीं देखा गया, लेकिन 2014 के बाद शिक्षा क्षेत्र में बड़ा क्वांटम जम्प आया है। उन्होंने कहा कि यह सुधार देश के भविष्य निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
रिपोर्ट में पेश किए गए मुख्य आंकड़े
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बिजली कनेक्शन:
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2004-2014: केवल 53% स्कूलों में बिजली की सुविधा थी।
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2024: यह बढ़कर 93% हो गई है।
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कंप्यूटर सुविधा:
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आज के समय 57.2% स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध है, जो पिछले दशक के मुकाबले काफी अधिक है।
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इंटरनेट कनेक्टिविटी:
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2013-2014: केवल 7.3% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा थी।
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2024: अब यह बढ़कर 57% हो गई है।
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शिक्षा मंत्री ने बताया कि जल्द ही सभी स्कूलों में इंटरनेट केबल कनेक्शन उपलब्ध करवाया जाएगा।
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हैंडवॉश सुविधा:
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2013: केवल 43.1% स्कूलों में हैंडवॉश की व्यवस्था थी।
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2024: अब यह बढ़कर 95% हो गई है।
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पुस्तकालय की सुविधा:
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2013-2014: स्कूलों में 75% पुस्तकालय थे।
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2024: अब यह बढ़कर 89% हो गए हैं।
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दिव्यांग छात्रों के लिए रैंप:
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दिव्यांग छात्रों को शिक्षा में सुविधा देने के लिए अब स्कूलों में रैंप की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा:
“बीते 10 सालों में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं, जो लंबे समय से अधूरे थे। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में 100% स्कूल आधुनिक सुविधाओं से लैस हों।”
भविष्य की योजनाएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार आने वाले वर्षों में सभी स्कूलों को डिजिटल कनेक्टिविटी, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं देने पर काम कर रही है।
शिक्षा मंत्री द्वारा पेश की गई रिपोर्ट यह दर्शाती है कि बीते 10 सालों में स्कूली शिक्षा में अभूतपूर्व सुधार हुए हैं। चाहे बिजली, इंटरनेट, कंप्यूटर हो या दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाएं – शिक्षा क्षेत्र में हुई ये प्रगति भारत के भविष्य को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।