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सीबी के लिए उधार नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित

गैर-जमानती ऋण सीमा दोगुनी करने की तैयारी

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 6 फरवरी 2026 को जारी विकासात्मक एवं विनियामक नीतियों के बयान के तहत शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए उधार मानदंडों में व्यापक संशोधन का मसौदा जारी किया है। 10 फरवरी 2026 को सार्वजनिक अभिमत के लिए जारी इन प्रस्तावों के अनुसार, गैर-जमानती ऋणों की परिभाषा को तर्कसंगत बनाया जाएगा और व्यक्तिगत ऋण सीमाओं में वृद्धि की जाएगी।

सबसे अहम प्रस्ताव यह है कि यूसीबी द्वारा दिए जाने वाले ऐसे अग्रिमों की समग्र सीमा को वर्तमान में कुल आस्तियों के 10% से बढ़ाकर कुल अग्रिमों के 20% तक किया जाए। इससे सहकारी बैंकों को अधिक लचीलापन मिलेगा और ग्राहकों के लिए ऋण उपलब्धता बढ़ेगी।

🏠 आवास ऋण व उपभोक्ता ऋण में राहत

मसौदे में नाममात्र सदस्यों को उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की खरीद के लिए ऋण सीमा ₹2.5 लाख प्रति उधारकर्ता तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। साथ ही, टीयर-3 और टीयर-4 श्रेणी के यूसीबी के लिए आवास ऋणों की अवधि और अधिस्थगन (मोराटोरियम) आवश्यकताओं को विनियमन से मुक्त करने का सुझाव दिया गया है।

आरबीआई ने तीन प्रमुख संशोधन निदेश जारी किए हैं—

  1. शहरी सहकारी बैंक – सकेंद्रण जोखिम प्रबंधन संशोधन निदेश, 2026
  2. शहरी सहकारी बैंक – ऋण सुविधाएँ संशोधन निदेश, 2026
  3. शहरी सहकारी बैंक – वित्तीय विवरण: प्रस्तुति एवं प्रकटीकरण (द्वितीय संशोधन) निदेश, 2026

इसके अलावा, कुछ अतिरिक्त प्रकटीकरण आवश्यकताओं का भी प्रस्ताव है ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत हो सके।

हितधारकों और आम जनता से 4 मार्च 2026 तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्रतिक्रियाएं आरबीआई की वेबसाइट के ‘कनेक्ट 2 रेगुलेट’ सेक्शन या ईमेल के माध्यम से भेजी जा सकती हैं।

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