क्राइम

“हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा? डॉक्टर आमोद कुमार सचान पर करोड़ों की हेराफेरी के आरोप”

ट्रस्ट डीड में कथित कूटरचना, गुप्त बैंक खाते और पुलिस की चुप्पी—अदालत पहुंचा मामला, जांच की मांग तेज

निश्चयट टाइम्स डेस्क।

गरीबों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से स्थापित हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट अब गंभीर विवादों में घिर गया है। ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी और वाइस चेयरमैन बृज किशोर सिंह (लगभग 70 वर्ष) ने ट्रस्ट के चेयरमैन डॉक्टर आमोद कुमार सचान पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी और विश्वासघात का प्रतीक हो सकता है।

👉 सेवा के नाम पर बना था ट्रस्ट

बताया गया है कि वर्ष 2004 में ट्रस्ट की स्थापना समाजसेवा, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में जरूरतमंदों की मदद और मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। ट्रस्ट में कई प्रतिष्ठित चिकित्सक और समाज के गणमान्य लोग शामिल थे। सामूहिक निर्णय के बाद ट्रस्ट की जिम्मेदारी डॉक्टर आमोद कुमार सचान को सौंपी गई थी, क्योंकि वे चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े होने के कारण इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए उपयुक्त माने गए।

🔴 भरोसे का कथित दुरुपयोग

शिकायत में कहा गया है कि अन्य ट्रस्टियों ने बिना संदेह किए दस्तावेजों और बैठकों से जुड़े कागजात पर हस्ताक्षर किए, यह मानते हुए कि ट्रस्ट जनहित में कार्य कर रहा होगा। लेकिन हाल ही में सामने आई जानकारी ने सभी को चौंका दिया।

आरोप है कि मूल ट्रस्ट डीड में कथित कूटरचना (फर्जी बदलाव) कर दी गई और उसी आधार पर एचडीएफसी बैंक में अतिरिक्त खाते खोल लिए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन खातों के जरिए लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के लेन-देन, क्रेडिट लिमिट और बैंक गारंटी ली गई।

⚠️ ट्रस्टियों के नाम हटाने का आरोप

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि संशोधित दस्तावेजों में कई मूल ट्रस्टियों के नाम हटाकर डॉक्टर सचान और उनकी पत्नी को प्रमुख पदों पर दर्शाया गया। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि पूरा मामला पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है।

💰 करोड़ों के दुरुपयोग की आशंका

प्रार्थी के अनुसार, ट्रस्ट के नाम पर बड़ी धनराशि का हस्तांतरण किया गया और अन्य ट्रस्टियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामले में आपराधिक षड्यंत्र, जालसाजी और धोखाधड़ी जैसी गंभीर धाराएं बनती हैं, इसलिए विस्तृत और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी बताई जा रही है।

🚨 शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

बताया गया है कि इस पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत थाना कैसरबाग में दी गई थी। इतना ही नहीं, 13 जनवरी 2026 को पुलिस आयुक्त को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भी शिकायत भेजकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

❓ पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

कार्रवाई में देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या प्रभावशाली लोगों के कारण जांच आगे नहीं बढ़ रही?
क्या गरीबों की सेवा के नाम पर चल रहे ट्रस्टों की निगरानी पर्याप्त है?

⚖️ न्यायालय की शरण

पुलिस से निराश होकर शिकायतकर्ता ने अब अदालत का दरवाजा खटखटाया है। न्यायालय से मांग की गई है कि पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, प्रार्थी और उसके परिवार की सुरक्षा की भी गुहार लगाई गई है।

🔥 भरोसे पर सबसे बड़ा हमला?

यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल आर्थिक घोटाला नहीं बल्कि समाज सेवा के नाम पर लोगों के विश्वास के साथ हुई बड़ी ठगी माना जाएगा। ऐसे ट्रस्ट, जिन पर आम जनता भरोसा करती है, यदि विवादों में घिरते हैं तो यह पूरे सामाजिक तंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।

अब निगाहें प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं—
क्या सच सामने आएगा या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?


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