मतदाता सूची पुनरीक्षण में बड़ी प्रगति

- 12 राज्यों में एसआईआर का दूसरा चरण लगभग पूरा
नई दिल्ली। बिहार के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने रविवार को जारी अपने दैनिक बुलेटिन में बताया कि एसआईआर के दूसरे चरण में कई राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। अधिकांश क्षेत्रों में मतदाता-विशिष्ट गणना प्रपत्र (EF) का वितरण और उसका डिजिटलीकरण लगभग पूरा हो चुका है। आयोग के अनुसार, लक्षद्वीप, गोवा और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह ने 100 प्रतिशत ईएफ वितरण पूरा कर लिया है। राजस्थान में भी ईएफ का पूरा वितरण हो चुका है, हालांकि 193-अंता विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के कारण यह प्रक्रिया रोकी गई थी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी में ईएफ वितरण का स्तर क्रमशः 99.99%, 99.99% और 99.98% तक पहुँच गया है। डिजिटलीकरण के मामले में लक्षद्वीप और राजस्थान अग्रणी हैं और उन्होंने अपना कार्य पूर्ण कर लिया है।
मध्य प्रदेश ने 99.89% और छत्तीसगढ़ ने 99.83% डिजिटलीकरण के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है। पश्चिम बंगाल 99.54%, गुजरात 99.04%, तमिलनाडु 99% और केरल 96.89% डिजिटलीकरण के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश, जहाँ 15 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, वहाँ ईएफ वितरण 99.94% तक पहुँच चुका है, जबकि डिजिटलीकरण 95.72% दर्ज किया गया है। सूचीबद्ध सभी 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक कुल 50.94 करोड़ फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का 99.94% हिस्सा है। इनमें से 50.06 करोड़ फॉर्म डिजिटलीकृत हो चुके हैं, यानी कुल फॉर्म का 98.22%। ईसीआई ने कहा कि डिजिटलीकृत डाटा में अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ भी शामिल हैं, जिन्हें सत्यापन के दौरान चिन्हित किया जाएगा।
चुनाव आयोग ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे सत्यापन कार्य की गति बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केरल में फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दी गई है, ताकि सभी मतदाता अपने विवरण समय पर अपडेट कर सकें। एसआईआर के इस चरण में हुई तेज प्रगति से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग देशभर की मतदाता सूचियों को अधिक सटीक, अद्यतित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले महीनों में इन राज्यों में संशोधित मतदाता सूची जारी होने के बाद सत्यापन प्रक्रिया और भी तेज होगी।



