नवरात्रि: देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पर्व

Nishchay Times लखनऊ: नवरात्रि, देवी दुर्गा को समर्पित नौ दिनों का पवित्र त्योहार है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, इन नौ रूपों में महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, योगमाया, रक्तदंतिका, शाकुंभरी देवी, दुर्गा, भ्रामरी देवी और चंडिका प्रमुख हैं। इन्हें क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के नाम से पूजा जाता है।
देवी सती की तपस्या और योगाग्नि में देह त्याग
नवरात्रि से जुड़े देवी सती की कथा अत्यंत महत्वपूर्ण है। सती भगवान शिव की अर्द्धांगिनी थीं। एक बार उनके पिता दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया और शिव जी को निमंत्रण नहीं दिया। सती का मन अत्यंत व्याकुल था, वे माता और बहनों से मिलने के लिए अत्यधिक इच्छुक थीं। भगवान शिव के समझाने के बावजूद सती ने यज्ञ में जाने का निश्चय किया।

जब सती अपने पिता के घर पहुंचीं, तो वहां उन्हें कोई आदर-सत्कार नहीं मिला। केवल उनकी माता ने स्नेहपूर्वक गले लगाया। दक्ष ने भगवान शिव के प्रति अपमानजनक बातें कहीं, जिसे सुनकर सती का हृदय ग्लानि और क्रोध से भर गया। उन्होंने भगवान शिव के अपमान को सहन न करते हुए योगाग्नि में स्वयं को भस्म कर दिया।
पुनर्जन्म और शैलपुत्री का स्वरूप
इस दुखद घटना का समाचार जब भगवान शिव को मिला, तो वे अत्यंत क्रोधित हुए और अपने गणों को भेजकर दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करा दिया। देवी सती ने योगाग्नि में देह त्यागने के बाद शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में पुनर्जन्म लिया। इस बार वे शैलपुत्री नाम से प्रसिद्ध हुईं।
शैलपुत्री देवी का विवाह भी भगवान शिव से ही हुआ। उनके अन्य नाम पार्वती और हेमवती भी हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन देवी शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है। उनका आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

नवरात्रि का पर्व हमें शक्ति और समर्पण का संदेश देता है। यह पर्व हमें देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की महिमा को जानने और जीवन में सकारात्मकता लाने की प्रेरणा देता है। नवरात्रि के दौरान शक्ति की उपासना कर लोग अपने जीवन को सफल बनाने का संकल्प लेते हैं। मां दुर्गा के इन नौ रूपों की पूजा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है।



