ओडिशा के पुरी में स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर की बाहरी चारदीवारी ‘मेघनाद पचेरी’ में दरारों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बीजू जनता दल (बीजद) के बीच आरोप-प्रत्यारोप की जंग छिड़ गई है। भाजपा ने बीजद को दोषी ठहराते हुए कहा कि पिछली बीजद सरकार की हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना के दौरान किए गए निर्माण कार्यों के चलते ये दरारें आई हैं, जबकि बीजद ने भाजपा के आरोपों को “राजनीति से प्रेरित” बताते हुए खारिज कर दिया है।
कानून मंत्री का बयान
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने इस मुद्दे पर कहा कि मेघनाद पचेरी की संरचना को परिक्रमा प्रकल्प (हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना) के दौरान हुए निष्कासन कार्य से नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि स्थानीय निवासियों और पुजारियों का भी मानना है कि परियोजना के दौरान की गई गहरी खुदाई के कारण यह दरारें आई हैं। हरिचंदन ने जानकारी दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दरारें मिलने के बाद तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है।
भाजपा का सीधा आरोप
ओडिशा भाजपा प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से बीजद सरकार को जिम्मेदार ठहराया। बिस्वाल ने कहा कि हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना के तहत मेघनाद पचेरी के पास 20 फीट गहरी खुदाई की गई थी, जिससे इस प्राचीन संरचना को खतरा उत्पन्न हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजद ने राजनीतिक लाभ के लिए इस परियोजना को अंजाम दिया, जिससे राज्य की जनता अब उसकी कीमत चुका रही है।
बीजद ने भाजपा के आरोपों को किया खारिज
भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए बीजद के विधायक गणेश्वर बेहरा ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा के पास इस तरह की संरचनात्मक समस्या का आकलन करने के लिए कोई तकनीकी विशेषज्ञता है। उन्होंने कहा कि यदि विशेषज्ञ ऐसा दावा करते तो माना जा सकता था, लेकिन भाजपा के आरोप केवल राजनीति से प्रेरित हैं।
मंदिर प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस बीच, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने बताया कि मेघनाद पचेरी की मरम्मत का कार्य जारी है। एसजेटीए ने मंदिर की सुरक्षा और संरचना की मजबूती के लिए एएसआई के साथ मिलकर काम करने की बात कही है, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचा जा सके।
जनता की प्रतिक्रिया
जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी इस विवादित खबर पर जनता में मिलीजुली प्रतिक्रिया है। जहां कुछ लोग भाजपा के आरोपों से सहमत हैं, वहीं कई लोग इसे आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक बयानबाजी के रूप में देख रहे हैं।