नई दिल्ली: कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक देश-एक चुनाव’ के प्रस्ताव को नकारते हुए इसे अव्यावहारिक करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनाव नजदीक आते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठाती है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में बनी उच्च स्तरीय समिति ने इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट केंद्रीय मंत्रिमंडल को सौंपी है।
भाजपा पर गंभीर आरोप
खरगे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह व्यावहारिक नहीं है। जब चुनाव पास आते हैं और भाजपा के पास उठाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं होता, तो वे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे सामने लाते हैं।” खरगे का मानना है कि इस तरह के प्रावधानों से मौजूदा लोकतांत्रिक ढांचे को चुनौती मिल सकती है। उन्होंने कहा कि देश को असली मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, जैसे महंगाई, बेरोजगारी और विकास।
‘एक देश-एक चुनाव’ पर समिति की सिफारिश
उधर, भाजपा सरकार ने ‘एक देश-एक चुनाव’ को लेकर कोविंद समिति की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस प्रस्ताव को देशभर में व्यापक समर्थन मिला है और अब इसे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है। समिति ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की है।
संसाधनों की बचत और लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूती
समिति का मानना है कि एक साथ चुनाव कराने से देश के संसाधनों की बचत होगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी। इसके अलावा, समिति ने कहा कि इससे लोकतांत्रिक ढांचे की नींव और मजबूत होगी और ‘इंडिया, जो भारत है’ की आकांक्षाओं को साकार करने में मदद मिलेगी।
विधि आयोग की रिपोर्ट का इंतजार
इसके साथ ही, विधि आयोग भी इस मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लंबे समय से इस प्रस्ताव का समर्थन करते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 2029 से लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश विधि आयोग द्वारा की जा सकती है।
इस बीच, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने ‘एक देश-एक चुनाव’ के विचार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि यह जमीनी स्तर पर व्यावहारिक नहीं है और इससे देश की विविधता को झटका लग सकता है।
Back to top button