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पंडित सिंह: गोंडा जिले के पूर्व कैबिनेट मंत्री की पूरी जीवनी और ग्रामीण राजनीति में उनका महत्वपूर्ण योगदान

पंडित सिंह, जिनका पूरा नाम विनोद कुमार सिंह था, उत्तर प्रदेश राज्य के एक प्रमुख और सम्मानित राजनेता थे। 7 जनवरी 1962 को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नवाबगंज क्षेत्र के बल्लीपुर गांव में जन्मे पंडित सिंह ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत समाजवादी पार्टी (सपा) से 1992 में की। उनकी स्पष्टवादिता, निर्भीकता और जनता के प्रति स्नेह ने उन्हें जिले में एक अद्वितीय पहचान दिलाई।

प्रारंभिक जीवन और परिवार

पंडित सिंह का जन्म एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता एक साधारण किसान थे, जिनकी मेहनत और ईमानदारी ने पंडित सिंह को जीवन की सच्चाई और संघर्ष की राह सिखाई। उनकी पत्नी का नाम सोना सिंह है, जो हमेशा उनके साथ राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में सहयोगी बनीं।

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राजनीतिक करियर की शुरुआत

पंडित सिंह ने 1992 में समाजवादी पार्टी में शामिल होकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। उनकी कर्मठता और जनता के प्रति समर्पण ने उन्हें 1996 में गोंडा की सदर विधानसभा सीट पर विधायक के रूप में जीत दिलाई। इस पहली जीत ने उन्हें राजनीति में एक मजबूत आधार प्रदान किया और उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। 3 बार विधायक चुने गए एवं 4 बार के मंत्री पद पर पंडित सिंह ने राज्य मंत्री से लेकर के कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया था। जिसमे 2007 में पंडित जी 2000 वोटो से हार गए थे. लेकिन जनता के बीच ऐसी लोकप्रियता पहली बार देखने को मिली थी ऐसे में जनता ने एक नारा भी दिया था .

“न खाता न बही
जो पंडित सिंह कहे वही सही”

 

मंत्री पद की जिम्मेदारियां

विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह 1996 में वह पहली बार तेरहवीं विधानसभा के सदस्य
निर्वाचित हुए। फरवरी 2002 में समाजवादी पार्टी से विधायक चुने गए 2003 में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव
के मंत्रिमंडल में चिकित्सा एवं शिक्षा राज्य मंत्री बनाए गए। सन 2012 में तीसरी बार वह फिर से समाजवादी पार्टी से
विधायक चुने गए। पंडित सिंह कैबिनेट में चिकित्सा एवं शिक्षा राज्य मंत्री, कैबिनेट में राजस्व मंत्री, माध्यमिक शिक्षा मंत्री, और कृषि मंत्री भी रहे.

“अक्टूबर 2012 में उन्होंने सीएमओ काण्ड के चलते मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। अगले 2 महीने जाँच के बाद अखिलेश सरकार ने
उनको कैबिनेट मंत्री कृषि के पद से नवाजा।”

सन 1996 से 2003 की अवधि के बीच वह लोक लेखा समिति सहित अन्य समितियों के सदस्य भी रहे। राजनैतिक सफर के दौरान उन्होंने अपनी बहू श्रद्धा सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया।

बेहद सादगीपूर्ण राजनीतिक सफर तय करने वाले पंडित सिंह अक्सर विवादों में भी घिरे रहे लेकिन उनसे
जल्दी उबर भी गए। खास बात ये थी कि राजनीतिक धुर विरोधियों के साथ ही उन्होंने कभी दुश्मनों जैसा व्यवहार
नहीं रखा। कार्यकर्ताओं के बीच एक अभिभावक के रूप में जाने-पहचाने जाने वाले पूर्वमंत्री का सामाजिक सेवा में
अतुलनीय योगदान रहा।

पंडित सिंह का एक नारा आज लोगो के दिलो में अपनी जगह बनाये हुए है .

“जिसका जलवा कायम है
उसका नाम मुलायम है”

2017 के चुनाव और परिवार की राजनीति

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में, पंडित सिंह ने अपने बड़े भाई स्वर्गीय रवींद्र सिंह के बेटे सूरज सिंह को राजनीति में स्थापित करने के लिए खुद तरबगंज विधानसभा से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने सूरज सिंह को सपा की टिकट दिलवाई, जिससे परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया।

अंतिम दिन और विरासत

अफसोस की बात है कि पंडित सिंह को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन से न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि अन्य राजनीतिक दलों में भी शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन से उनके अनुयायी और राजनीतिक साथी गहरा दुखी हुए, जो उनकी सच्ची और समर्पित सेवा के प्रतीक थे।

पंडित सिंह का जीवन राजनीतिक और सामाजिक सेवा के प्रति एक आदर्श उदाहरण है। उन्होंने अपनी कार्यशैली और निष्ठा से गोंडा जिले की राजनीति को नई दिशा दी और एक सच्चे नेता के रूप में अपने योगदान को अमर कर दिया।

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निधन

पंडित सिंह का निधन 7 मई 2021 में हुआ, लेकिन उनके कार्य और उनके योगदान हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। उनका जीवन एक प्रेरणा है, जो यह दर्शाता है कि ईमानदारी, समर्पण और सच्ची सेवा से किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है।

विनोद कुमार सिंह (पंडित सिंह) का जीवन और उनकी राजनीतिक यात्रा एक प्रेरणादायक कहानी है। उनकी भव्य उपलब्धियों और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने अपने कार्यों और नीतियों के माध्यम से एक सच्चे जनसेवक के रूप में अपनी छाप छोड़ी है।

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