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पटना हाईकोर्ट: गांधी मैदान ब्लास्ट केस में चार दोषियों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली

पटना, 11 सितंबर 2024 — 2013 में पटना के गांधी मैदान में हुए धमाकों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चार दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। पहले सिविल कोर्ट ने हैदर अली, मोजिबुल्लाह, नोमान और इम्तियाज को फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने अब इस सजा को बदलते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा दी है।
यह धमाका 27 अक्टूबर 2013 को भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित हुंकार रैली के दौरान हुआ था, जिसमें तब के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे। धमाके की शुरुआत पटना जंक्शन पर हुई थी, और इसके बाद गांधी मैदान में एक घंटे के भीतर कुल छह धमाके हुए थे। इन धमाकों में छह लोगों की मौत हो गई थी।
पटना हाईकोर्ट ने इस फैसले के साथ उमर और अजहरुद्दीन को उम्रकैद की सजा देने के निचली अदालत के फैसले को भी बरकरार रखा। मामले के अन्य दोषियों को भी सजा सुनाई गई थी, जिसमें आतंकवाद के आरोपियों को IPC और UAPA की गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था।
27 अक्टूबर 2021 को एनआईए की विशेष अदालत ने कुल नौ अपराधियों को सजा दी थी, जिसमें चार को फांसी और दो को उम्रकैद की सजा शामिल थी। हाल ही में 20 मई 2023 को एनआईए द्वारा एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई, जो पहले फरार था, लेकिन इस लंबी अवधि के बाद उसकी गिरफ्तारी भी सवालों के घेरे में है।
इसी बीच, इफ्तिखार आलम को 7 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उसे सजा सुनाए जाते समय तक जेल में पहले से ही 7 साल बिताने के कारण 04 नवंबर 2021 को रिहा कर दिया गया था।इस मामले में उच्च न्यायालय का नया फैसला आने के बाद, अब मामले के सभी पक्षों में जिज्ञासा और चर्चा का विषय बन गया है।

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