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पीएम राहत योजना पर फोकस: सड़क हादसा पीड़ितों को मिलेगा 7 दिन तक ₹1.5 लाख का कैशलेस इलाज

🚑 112 हेल्पलाइन से सीधा अस्पताल कनेक्शन, गोल्डन ऑवर पर फोकस🚑 112 हेल्पलाइन से सीधा अस्पताल कनेक्शन, गोल्डन ऑवर पर फोकस

निश्यच टाइम्स न्यूज डेस्क | डीएफ

सड़क दुर्घटनाओं में हर साल हजारों जानें गंवाने वाले भारत में अब राहत की बड़ी पहल शुरू हो चुकी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने “पीएम राहत – सड़क दुर्घटना पीड़ितों का अस्पताल एवं सुनिश्चित उपचार” योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने की। 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लॉन्च की गई इस योजना के तहत सड़क हादसे के हर पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों तक अधिकतम ₹1.5 लाख का नकदरहित उपचार मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि “स्वर्णिम घंटे” के भीतर पीड़ित को अस्पताल पहुंचाकर मौतों की संख्या में भारी कमी लाई जाए।


योजना को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) 112 से जोड़ा गया है। कोई भी व्यक्ति – पीड़ित, राहगीर या ‘गुड समैरिटन’ – 112 डायल कर निकटतम नामित अस्पताल और एम्बुलेंस सहायता प्राप्त कर सकता है।

सरकार के अनुसार, यदि हादसे के एक घंटे के भीतर इलाज मिल जाए तो लगभग 50% मौतें रोकी जा सकती हैं। गैर-प्राणघातक मामलों में 24 घंटे और गंभीर मामलों में 48 घंटे के भीतर पुलिस प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह रहेगी।


डिजिटल ट्रैकिंग से भुगतान तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन

योजना के तहत MoRTH के eDAR प्लेटफॉर्म को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के TMS 2.0 सिस्टम से जोड़ा गया है। इससे दुर्घटना रिपोर्टिंग, अस्पताल में भर्ती, पुलिस सत्यापन, क्लेम प्रोसेसिंग और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। अस्पतालों को भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) से किया जाएगा। बीमित वाहन मामलों में बीमा कंपनियां और हिट-एंड-रन मामलों में केंद्र सरकार भुगतान करेगी। स्वीकृत क्लेम का निपटारा 10 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

जिला स्तर पर शिकायत निवारण, ‘पूरी सरकार’ का मॉडल

योजना की निगरानी जिला कलेक्टर/डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। राज्यों ने TMS 2.0 ऑनबोर्डिंग और PFMS क्रेडेंशियल निर्माण में प्रगति की जानकारी दी है। बैठक में परिवहन एवं स्वास्थ्य मंत्रालयों, राज्यों के डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे स्पष्ट है कि सरकार “पूरी सरकार के दृष्टिकोण” के तहत सड़क सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना रही है।



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