महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के पूर्व, पूर्व आईएएस ट्रेनी पूजा खेडकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं। उनके पिता, दिलीप खेडकर, ने अहमदनगर दक्षिण सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है, जिससे एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ है।
चुनावी हलफनामे में विवादास्पद ब्योरा
दिलीप खेडकर ने अपने चुनावी हलफनामे में खुद को तलाकशुदा बताया है, जबकि इसी वर्ष के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शादीशुदा होने की जानकारी दी थी। उनके हलफनामे में उनकी पत्नी का नाम मनोरमा खेडकर दर्ज था। इसके अलावा, उन्होंने कई ज्वॉइंट प्रॉपर्टी का विवरण भी दिया, और कहा कि उनका परिवार अभी भी संयुक्त परिवार की तरह रह रहा है। यह स्थिति इस तथ्य से और जटिल होती है कि दिलीप खेडकर ने वंचित बहुजन अघाड़ी के टिकट पर पिछले चुनाव में हिस्सा लिया था, जिसमें वे हार गए थे।
तलाक का ब्योरा और पारिवारिक स्थिति
हाल ही में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, दिलीप और मनोरमा खेडकर ने 2009 में पुणे की फैमिली कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर की थी, और 25 जून 2010 को कोर्ट ने तलाक का आदेश दे दिया था। हालांकि, तलाक के बाद भी दोनों एक ही बंगले में रहते हैं, जो मनोरमा खेडकर के नाम पर है।
पूजा खेडकर का विवादित मामला
पूजा खेडकर को हाल ही में यूपीएएससी द्वारा गलत तरीके से आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के लिए निलंबित किया गया था, लेकिन उन्होंने इन आरोपों से इंकार किया। दिल्ली की एकेडमियों में हुए माॅक इंटरव्यू के दौरान पूजा ने कहा था कि उनके परिवार की आय जीरो है क्योंकि उनके माता-पिता का तलाक हो चुका है, और वे अपनी मां के साथ रह रही हैं। लोकसभा चुनाव के हलफनामे के अनुसार, दिलीप खेडकर की संपत्ति 40 करोड़ रुपये घोषित की गई थी।
दिलीप खेडकर का नामांकन और उनके द्वारा दिए गए हलफनामे में विसंगतियों ने न केवल राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि परिवार के व्यक्तिगत मामलों का राजनीतिकरण कैसे हो रहा है। पूजा खेडकर का मामला भी इसी क्रम में आता है, जो इस चुनाव में और अधिक जटिलताएं पैदा कर सकता है।