जनता परेशान, सिस्टम लाचार? मंत्री को खुद करना पड़ा हस्तक्षेप
प्रीपेड मीटर के बावजूद भारी बिल: जनसुनवाई में उजागर हुई बिजली व्यवस्था की खामियां

पारदर्शिता के दावे बनाम जमीनी हकीकत: शिकायतों का अंबार, समाधान अधूरा
निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
ए.के. शर्मा द्वारा आयोजित जनसुनवाई में आम जनता की समस्याओं ने सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच का अंतर उजागर कर दिया। नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग से जुड़ी शिकायतों की लंबी सूची ने यह साफ कर दिया कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामियां बनी हुई हैं।
जनसुनवाई के दौरान इंटरलॉकिंग, नाली, सीवर और बिजली कनेक्शन से जुड़ी समस्याएं बड़ी संख्या में सामने आईं। लेकिन सबसे चौंकाने वाला मामला अमौसी क्षेत्र से आया, जहां प्रीपेड मीटर होने के बावजूद एक उपभोक्ता को ₹25,150 का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया। यह घटना न केवल तकनीकी गड़बड़ी बल्कि उपभोक्ता अधिकारों पर भी सवाल खड़े करती है।
मंत्री A.K. Sharma को खुद इस मामले में दखल देना पड़ा और ऊर्जा विभाग के चेयरमैन आशीष गोयल से तत्काल बातचीत कर जांच और समाधान के निर्देश देने पड़े। यह स्थिति दर्शाती है कि अगर शीर्ष स्तर पर हस्तक्षेप न हो, तो आम नागरिकों की समस्याएं अनसुनी रह सकती हैं।
हालांकि मंत्री ने पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसंतुष्टि को प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल निर्देशों से व्यवस्था सुधरेगी? या फिर जमीनी स्तर पर ठोस सुधार की जरूरत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार ऐसी शिकायतों का सामने आना सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर डालता है। अगर प्रीपेड मीटर जैसी आधुनिक व्यवस्था भी उपभोक्ताओं को राहत देने में विफल हो रही है, तो यह पूरी नीति की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।



