अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में ध्वजारोहण से पहले आयोजित झंडा पूजा का आयोजन शनिवार को पूरे वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। यह रस्म राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे अत्यंत श्रद्धा और परंपरा के साथ आयोजित किया गया। कल हुए कार्यक्रम का मुख्य फोकस राम मंदिर के शिखर पर फहराए जाने वाले पवित्र ध्वज की पूजा थी, जिसे विशेष रूप से तैयार किया गया है।
इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा रहे, जिन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर ध्वज की विधिवत पूजा की। इसके अलावा, समारोह में शामिल अन्य यजमानों ने भी अपनी पत्नियों के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, उत्साह और अध्यात्म की विशेष छटा देखने को मिली।
ध्वजारोहण से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान 20 नवंबर से शुरू हुए थे, जिनमें कलश यात्रा, प्रायश्चित पूजन और अन्य पारंपरिक विधियां शामिल रहीं। यह श्रृंखला 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर में ध्वज फहराने के साथ समाप्त होगी। यह आयोजन ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रस्ट की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ध्वजारोहण समारोह में 24 यजमानों को चुना गया है, जो मंदिर परिसर और किले क्षेत्र में स्थित विभिन्न मंदिरों में पूजा संपन्न करा रहे हैं। मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्रा के साथ-साथ कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हैं।
इनमें शामिल हैं—अयोध्या राजपरिवार से जुड़े शैलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा, होम्योपैथिक विशेषज्ञ चंद्र गोपाल पांडे, भाजपा जिला महासचिव शैलेंद्र कोरी, गैस एजेंसी संचालक शशि प्रियदर्शी, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व प्रॉक्टर डॉ. अजय प्रताप सिंह, प्रमुख उद्योगपति पीयूष सिंघल, व्यवसायी निरंकार मौर्य, और डॉ. नानक शरण, जो अपनी पत्नियों के साथ विधिवत पूजा कर रहे हैं।
पूरे कार्यक्रम के दौरान रामनगरी में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति दर्ज की गई। मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के चलते वातावरण अत्यंत भक्तिमय बना रहा। जैसे-जैसे 25 नवंबर की तारीख नजदीक आ रही है, अयोध्या में ध्वजारोहण समारोह को लेकर उत्साह चरम पर है।





