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उत्तर प्रदेश के अंडा उत्पादक किसानों का धरना- प्रदर्शन जारी

– पशुपालन निदेशालय लखनऊ में 13 फरवरी से जारी है प्रदर्शन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अंडा उत्पादक किसानों का धरना प्रदर्शन पशुपालन निदेशालय लखनऊ में 13 फरवरी से शुरू हुआ, और 17 फरवरी को भी जारी रहा। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने अपनी प्रमुख मांगों को जोर-शोर से उठाया, जिनमें एनईसीसी (National Egg Coordination Committee) पर पूर्ण प्रतिबंध, अंडे के रेट निर्धारण के लिए समिति का गठन, और अंडों पर खाद्य सुरक्षा मानक लागू करने की मांग शामिल है। किसानों ने यह भी कहा कि अंडों पर उत्पादन तिथि, उत्पादन का स्थान और अंतिम उपभोग अवधि अंकित की जानी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और ताजे अंडे मिल सकें।

समिति के अध्यक्ष वीपी सिंह ने कोल्ड स्टोरेज में अंडों को रखने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नियमों के अनुरूप शासनादेश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह धरना प्रदर्शन सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि अंडा उत्पादकों और सरकार की पोल्ट्री पॉलिसी को असफल करने में जुटे हुए एनईसीसी और अन्य अंडा माफियाओं के खिलाफ है। समिति के सचिव मोहम्मद नाजिम ने बताया कि खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण ने 2011 में अंडों को मांसाहारी खाद्य की श्रेणी में रखा था, जबकि उत्तर प्रदेश के कोल्ड स्टोरेज में अंडों को सब्जियों और आलू के लिए बने कोल्ड स्टोरेज में रखा जा रहा है। समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता मंसूर अहमद ने अंडों को रखने के लिए तुरंत मानक बनाने और कोल्ड स्टोरेज को अलग से लाइसेंस देने की व्यवस्था की मांग की। उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों को लाभ पहुंचाएगा और माफियाओं की मनमानी को रोका जा सकेगा। समिति के मीडिया प्रभारी वसी उल हसन और उपाध्यक्ष उमैर अब्बासी ने कहा कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया, तो वर्तमान बजट सत्र में विधायकों से अंडा उत्पादकों की समस्याओं को उठाने और प्रभावी कदम उठाने की अपील की जाएगी।

सहारनपुर के जिला अध्यक्ष रविंद्र कुमार ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज में रखे अंडे केवल 35 दिन तक खाए जा सकते हैं, लेकिन अंडा माफिया और एनईसीसी महीनों तक अंडे को कोल्ड स्टोरेज में रखकर बेच रहे हैं। इससे किसानों का ताजा अंडा उत्पादन लागत से भी कम मूल्य पर बिक रहा है, जो उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन रहा है।

धरने में विजेंद्र सिंह, रवि सिंह, पूर्वांचल प्रभारी डीपी सिंह, पश्चिमांचल प्रभारी मंसूर एहमद, वरुण श्रीवास्तव, गुडलक सिंह, निश्चल सिंह, कमरे आलम, माज़ अजमल, अमान, फैय्याज, एहसान, अशोक वर्मा, कुलदीप सिंह, साहिल राणा, विशाल सिंह, अब्दुल बासित, असद रज़ा, सद्दाम सहित अन्य प्रमुख किसान नेताओं ने भाग लिया। इन नेताओं ने अंडा उत्पादकों की समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

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