न्यूयॉर्क दौरे पर सवाल: जमीनी मुद्दों से दूर महिला-बाल विकास मंत्रालय?
विदेशी बैठकों में व्यस्त मंत्री, देश में चुनौतियां बरकरार

निश्चयट टाइम्स डेस्क। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर का न्यूयॉर्क दौरा एक ओर जहां अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बात करता नजर आया, वहीं दूसरी ओर इस यात्रा की प्राथमिकताओं को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सामाजिक विकास आयोग की बैठक के दौरान ग्वाटेमाला की उप मंत्री क्लाउडिया टेरेसा वैलेंजुएला लोपेज से मुलाकात में महिला सशक्तिकरण, समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन आलोचकों का कहना है कि भारत में अभी भी कुपोषण, आंगनवाड़ी संसाधनों की कमी और बाल सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे पूरी तरह हल नहीं हो पाए हैं।
मंत्री ने स्वयं-सहायता समूह, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और पीएम पोषण योजना जैसी पहल का उल्लेख करते हुए भारत के मॉडल को साझा करने की बात कही। हालांकि, विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उपलब्धियां गिनाने से पहले इन योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। कई राज्यों में आंगनवाड़ी केंद्रों की हालत, कर्मचारियों के मानदेय और पोषण कार्यक्रमों की गुणवत्ता पहले से ही बहस का विषय बनी हुई है।
ग्वाटेमाला के साथ साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस तरह की विदेशी भागीदारी का सीधा लाभ देश की महिलाओं और बच्चों तक पहुंच पाएगा या नहीं। आलोचकों के अनुसार, जब तक स्थानीय स्तर पर ढांचे को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह सकता है।
भारतीय समुदाय से संवाद के दौरान मंत्री ने “पंखुड़ी पोर्टल” और स्वैच्छिक योगदान की अपील की। इसे लेकर भी कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई कि सरकार की जिम्मेदारियों को कहीं स्वैच्छिक सहयोग पर तो नहीं छोड़ा जा रहा।
कुल मिलाकर, यह दौरा कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर माना जा रहा है, लेकिन इससे जुड़े ठोस परिणामों पर सबकी नजर रहेगी। अब बड़ा सवाल यही है—क्या ये अंतरराष्ट्रीय बैठकें भारत में महिला और बाल विकास की वास्तविक चुनौतियों को कम कर पाएंगी, या फिर यह केवल छवि निर्माण तक सीमित रह जाएंगी?



