
🔴 वर्कशॉप क्यों? क्या फील्ड में हालात बिगड़ चुके हैं
निश्चय टाइम्स डेस्क।
भारतीय रेलवे के मालगाड़ी संचालन में लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों, वैगन ब्रेकडाउन और रखरखाव में लापरवाही के बीच आरडीएसओ (RDSO) द्वारा झांसी वैगन वर्कशॉप में 9 फरवरी 2026 को एक दिवसीय नॉलेज-शेयरिंग वर्कशॉप आयोजित किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
अगर सिस्टम मजबूत है, तो बार-बार ऐसे वर्कशॉप्स की जरूरत क्यों पड़ रही है?
वैगन डायरेक्टोरेट, आरडीएसओ द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य भले ही वैगन से जुड़ी नवीनतम मेंटेनेंस गाइडलाइंस साझा करना बताया गया हो, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि अलग-अलग जोनल रेलवे में रखरखाव के मानकों में भारी असमानता देखी जा रही है। यही असमानता फ्रेट ट्रेनों की सुरक्षा और परिचालन विश्वसनीयता पर सीधा असर डाल रही है।
देशभर की विभिन्न जोनल रेलवे से आए लगभग 100 अधिकारी और पर्यवेक्षक इस बात का संकेत हैं कि समस्या केवल किसी एक जोन तक सीमित नहीं है। तकनीकी सत्रों में वैगन सेफ्टी, मेंटेनेंस चुनौतियां और फील्ड-लेवल समस्याओं पर चर्चा हुई, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ये चर्चाएं वास्तव में ट्रैक पर उतरेंगी या फाइलों में ही सिमट कर रह जाएंगी?
यह आरडीएसओ द्वारा आयोजित दूसरी ऐसी कार्यशाला है। इससे पहले जनवरी 2026 में जमालपुर स्थित IRIMEE में दो दिवसीय वर्कशॉप आयोजित की गई थी। बार-बार दिशा-निर्देश जारी होना इस ओर इशारा करता है कि रेलवे बोर्ड और आरडीएसओ के आदेश फील्ड में ठीक से लागू नहीं हो पा रहे हैं।
हालांकि दावा किया जा रहा है कि सभी 16 जोनल रेलवे को कवर किया जा रहा है, लेकिन जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी कार्यशालाएं सिर्फ “डैमेज कंट्रोल” बनकर रह जाएंगी।
फ्रेट ऑपरेशन की सुरक्षा देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी है, और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई भारी पड़ सकती है।



