‘रेल थ्रू राज’ में साम्राज्य, प्रतिरोध और भारतीय रेल के जन्म की जीवंत गाथा
निश्चय टाइम्स डेस्क।

भारतीय रेल के इतिहास को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाली पुस्तक ‘रेल थ्रू राज: ईस्ट इंडियन रेलवे (1841–1861)’ का भव्य विमोचन शनिवार को गोमतीनगर स्थित यूनिवर्सल बुकस्टोर में हुआ। रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्टरी के महाप्रबंधक प्रशांत कुमार मिश्र द्वारा लिखित इस पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक की लेखन शैली की सराहना करते हुए इसे शोधार्थियों, इतिहासकारों और रेलवे से जुड़े लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि ‘रेल थ्रू राज’ केवल रेलगाड़ियों या पटरियों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह उस दौर की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को भी सामने लाती है, जब रेलवे औपनिवेशिक शासन का एक अहम औजार था। उन्होंने लेखक प्रशांत कुमार मिश्र के गहन शोध और तथ्यात्मक प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी पुस्तकें आने वाली पीढ़ियों को इतिहास को समझने में मार्गदर्शन देती हैं।
पुस्तक के लेखक प्रशांत कुमार मिश्र ने बताया कि यह कृति ईस्ट इंडियन रेलवे के प्रारंभिक दो दशकों—1841 से 1861—का विस्तृत, प्रामाणिक और शोधपरक इतिहास प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल तकनीकी या प्रशासनिक विवरण तक सीमित नहीं है, बल्कि साम्राज्य, प्रतिरोध और उस लौहपथ की कथा है, जिसने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से आपस में जोड़ दिया। पुस्तक में यह भी दर्शाया गया है कि किस प्रकार रेलवे ने औपनिवेशिक सत्ता को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य में राष्ट्रीय एकता की नींव भी रखी।
कार्यक्रम में रेलवे अधिकारी अष्टानंद पाठक ने मॉडर्न कोच फैक्टरी की उपलब्धियों और भारतीय रेलवे के आधुनिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रशांत कुमार मिश्र जैसे अधिकारी न केवल प्रशासनिक कार्यों में दक्ष हैं, बल्कि लेखन और शोध के माध्यम से रेलवे के इतिहास को सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य भी कर रहे हैं।
गौरतलब है कि महाप्रबंधक पी.के. मिश्र की इससे पूर्व ‘हाईवेज ऑफ हिंदुस्तान’ और ‘ट्रैक्स ऑफ नेसेसिटी: रेलवे, फैमिन एंड एम्पायर इन द डेक्कन’ जैसी चर्चित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा ‘टेल्स फ्रॉम रेल्स’ में उनकी 32 कहानियों का संकलन भी पाठकों के बीच सराहा गया है।
पुस्तक विमोचन समारोह में रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य आलोक जौहरी, अतुल्य सिन्हा, एस.के. कटियार, अनिल श्रीवास्तव, गौरव प्रकाश, मानव प्रकाश और चंद्र प्रकाश सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान नंदिनी ने लेखक के साथ पुस्तक के विषय-वस्तु, शोध प्रक्रिया और ऐतिहासिक दृष्टिकोण पर संवाद किया।
समग्र रूप से यह आयोजन साहित्य, इतिहास और रेलवे के संगम का साक्षी बना, जहां ‘रेल थ्रू राज’ को भारतीय रेल इतिहास की एक महत्वपूर्ण और संदर्भयोग्य कृति के रूप में प्रस्तुत किया गया।



