धर्म

“रामोत्सव 2025: ऐशबाग की रामलीला में वनवास

तीन लोकों के राजा ने वंचितों के उद्वार के लिए की वनवास की लीला – रामोत्सव 2025 का पांचवा दिन

तुम भी केवट, मैं भी केवट

कैसे तुमसे लूं उतराई ।

कर दीजौ भव पार प्रभु

जब घाट तेहारे अइहौं ।।

निश्चय टाइम्स, लखनऊ । श्री रामलीला समिति ऐशबाग मे चल रहे रामोत्सव 2025 के मंच पर शुक्रवार को भास्कर नृत्य कला केंद्र कोलकाता के कलाकारों ने श्रीराम वन गमन , निषादराज से मिलन, केवट संवाद , सुमंत की अयोध्या वापसी , श्रीराम महार्षि बाल्मीकि संवाद , श्रवण कुमार कथा , पुत्र वियोग में राजा दशरथ का देहावसान , कैकेई भरत संवाद एवं कैकेई परित्याग जैसी लीलाओं का मंचन किया गया । रामलीला मंचन के दृश्यों में जहां श्रीराम के वनवास से दुखी राजा दशरथ की वेदना लोगों को भावुक करती है तो वहीं श्रवण कुमार और उनके माता-पिता की मृत्यु के दृश्य आंखें नम कर देते हैं अगले ही दृश्य में निषाद राज से श्रीराम की भेंट और केवट संवाद दर्शकों के चेहरों पर श्रीराम की भक्ति के भाव जाग्रत कर देते हैं । श्री रामलीला समिति ऐशबाग के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल ने बताया कि ऐशबाग की इस ऐतिहासिक रामलीला को देखने के लिए प्रतिदिन लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है जिसे देखते हुए समिति ने दर्शकों के बैठने का अतिरिक्त प्रबंध किया है ताकि लोगों को रामलीला देखने में किसी प्रकार का कष्ट न हो । उन्होंने बताया कि शनिवार रामलीला में श्रीराम कुटी का निर्माण , भरत जी का वन प्रस्थान , श्रीराम भरत मिलन , भरत जी का श्रीराम चरणपादुका लेकर अयोध्या प्रस्थान भरत जी का महल परित्याग एवं नंदीग्राम गमन के साथ ही कैकई विलाप की लीलाओं का मंचन मुख्य आकर्षण रहेंगे ।रामलीला के मंचन से पूर्व होने वाले सांस्कृतिक मंच पर ध्वनि फाउंडेशन द्वारा ऋचा तिवारी के निर्देशन में गणेश वंदना के मंच का श्री गणेश किया गया । इसके बाद गीत राधा गोरी गोरी , चक्रव्यूह नृत्य नाटिका , दुर्गा स्तुति , रासलीला एवं तराना की प्रस्तुति दी जिसे दिव्या तिवारी, अर्शिता, सौम्या, विऋुति, अश्विका, संस्कृति, अर्शजोत, काशवी शर्मा, गरिमा, उदयन, आनंदी, काव्या, अंकिता, अनन्या, ओशनिक, अदिति व श्रष्टि ने प्रस्तुत किया । इसके उपरांत घुघरू नृत्य संगम अकादमी के कलाकार अदिति, तनिशी, गार्गी, अविका, आराध्या, रिशिता, मनीषा यादव, मक्का सिंह, मौसमी, दीप्ती, मालसी व अवंति द्वारा गणेश स्तुति, युगल नृत्य, प्रयागराज का ढ़ेड़िया नृत्य, घूमर व महारास की प्रस्तुतियां दी गईं ।

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