अंतरराष्ट्रीय

“टेस्टिंग ग्राउंड बना ईरान?” अमेरिकी मिसाइल से स्कूल और स्पोर्ट्स हॉल तबाह

नागरिकों पर प्रयोग? बिना परीक्षण वाली मिसाइल से हमला, 21 की मौत

सैन्य लक्ष्य के नाम पर नागरिक हताहत—अमेरिकी कार्रवाई पर गंभीर सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क

28 फरवरी 2026 को ईरान के शहर लमेरद में हुआ अमेरिकी हमला अब गंभीर अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप लेता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में एक स्पोर्ट्स हॉल और उसके पास स्थित प्राथमिक स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हुई। चौंकाने वाली बात यह है कि इस हमले में कथित रूप से एक नई और युद्ध में पहले कभी इस्तेमाल न की गई मिसाइल—Precision Strike Missile—का उपयोग किया गया।

विश्लेषण में सामने आया है कि यह मिसाइल अपने लक्ष्य के ऊपर हवा में विस्फोट करती है और टंगस्टन के छोटे-छोटे टुकड़ों को चारों ओर फैलाकर अधिकतम नुकसान पहुंचाती है। सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका ने इस तकनीक का परीक्षण सीधे नागरिक इलाकों में किया? यदि हां, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और युद्ध कानूनों का खुला उल्लंघन माना जा सकता है।

उसी दिन ईरान के मिनाब शहर में भी Tomahawk cruise missile से एक स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें 175 लोगों की मौत बताई जा रही है। लगातार दो हमलों में नागरिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने से यह संदेह और गहरा हो गया है कि सैन्य कार्रवाई की आड़ में आम लोगों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।

अमेरिका की ओर से अब तक इन हमलों पर कोई स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं की गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर उसकी सैन्य नीति पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह “सटीक हमले” (Precision Strikes) की अवधारणा का विफल उदाहरण है या फिर जानबूझकर अपनाई गई रणनीति?

यह घटनाक्रम न केवल युद्ध के नैतिक मानकों को चुनौती देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आधुनिक हथियारों की होड़ में इंसानी जिंदगी की कीमत कितनी कम होती जा रही है। यदि इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसे हमले और बढ़ सकते हैं।

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