उत्तर प्रदेश

RBI की कार्रवाई से खुली पोल: नियमों की अनदेखी में फंसा इटावा का सहकारी बैंक

डायरेक्टर को लोन, NPA छुपाने का आरोप—बैंकिंग सिस्टम में लापरवाही उजागर

KYC से लेकर एक्सपोजर लिमिट तक उल्लंघन—छोटा जुर्माना, बड़े सवाल

इटावा/लखनऊ, 30 मार्च 2026:
भारतीय रिजर्व बैंक ने नागर सहकारी बैंक लिमिटेड इटावा पर 3 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। सतही तौर पर यह रकम भले ही छोटी लगे, लेकिन इसके पीछे उजागर हुई अनियमितताएं बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

आरबीआई की जांच में सामने आया कि बैंक ने निदेशकों और उनसे जुड़े लोगों को नियमों के खिलाफ ऋण स्वीकृत किए। यह हितों के टकराव (Conflict of Interest) का स्पष्ट मामला माना जाता है, जो बैंकिंग नैतिकता के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

इतना ही नहीं, बैंक ने कुछ उधारकर्ताओं के खातों को समय पर NPA घोषित नहीं किया। यानी खराब ऋणों को छुपाकर बैंक की वास्तविक वित्तीय स्थिति को बेहतर दिखाने की कोशिश की गई। यह कदम न केवल नियामकीय उल्लंघन है, बल्कि जमाकर्ताओं के भरोसे के साथ भी सीधा खिलवाड़ है।

इसके अलावा, एकल उधारकर्ता पर तय सीमा से अधिक कर्ज देना और KYC रिकॉर्ड को सेंट्रल रजिस्ट्री में अपलोड न करना जैसे गंभीर नियमों की अनदेखी भी सामने आई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उल्लंघन मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

हालांकि आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना केवल अनुपालन की कमियों पर आधारित है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इतनी छोटी राशि का दंड ऐसे गंभीर मामलों में पर्याप्त है?

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