RBI ने AD Category–I बैंकों के लिए रिपोर्टिंग निर्देशों पर ड्राफ्ट जारी किया
9 मार्च 2026 तक मांगे सुझाव

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क।
Reserve Bank of India (RBI) ने ऑथराइज्ड डीलर कैटेगरी–I बैंकों के लिए रिपोर्टिंग इंस्ट्रक्शंस पर ड्राफ्ट डायरेक्शंस जारी किए हैं। केंद्रीय बैंक ने बाजार प्रतिभागियों, हितधारकों और अन्य इच्छुक पक्षों से 9 मार्च 2026 तक इस ड्राफ्ट पर सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
RBI ने कहा है कि फीडबैक ईमेल के माध्यम से “Feedback on Draft Directions on Reporting Instructions for Authorised Dealer Category – I Banks” विषय पंक्ति के साथ भेजा जा सकता है या मुख्य महाप्रबंधक, वित्तीय बाजार विनियमन विभाग, आरबीआई, मुंबई को डाक द्वारा प्रेषित किया जा सकता है।
ओटीसी डेरिवेटिव बाजार में पारदर्शिता पर जोर
आरबीआई ने हाल के वर्षों में ओवर द काउंटर (OTC) विदेशी मुद्रा, ब्याज दर और क्रेडिट डेरिवेटिव बाजारों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। वर्तमान में बाजार निर्माता सभी ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन की रिपोर्ट Clearing Corporation of India Limited (CCIL) के ट्रेड रिपॉजिटरी (TR) में करते हैं।
हालांकि, अपतटीय (ऑफशोर) रुपये डेरिवेटिव लेनदेन की बड़ी संख्या रिपोर्ट नहीं होने के कारण बाजार में आंशिक अपारदर्शिता बनी हुई थी। इस कमी को दूर करने के लिए अक्टूबर 2022 में स्टैंडअलोन प्राइमरी डीलरों को अपने संबंधित पक्षों द्वारा वैश्विक स्तर पर किए गए सभी रुपये डेरिवेटिव सौदों की रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में भारतीय बैंकों को भी वैश्विक स्तर पर किए गए रुपये ब्याज दर डेरिवेटिव लेनदेन की रिपोर्टिंग के निर्देश दिए गए।
अब विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव भी दायरे में
पारदर्शिता की इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अब प्रस्ताव है कि सभी AD Category–I बैंक अपने संबंधित पक्षों द्वारा वैश्विक स्तर पर किए गए रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की भी रिपोर्ट करें।
आरबीआई का मानना है कि इससे रुपये डेरिवेटिव बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और बाजार प्रतिभागियों को बेहतर मूल्य निर्धारण (प्राइसिंग) निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इस उद्देश्य से ड्राफ्ट डायरेक्शंस जारी कर सार्वजनिक सुझाव मांगे गए हैं।



