सुरक्षित मातृत्व पर लखनऊ में बड़ा मंथन, 500 विशेषज्ञों की भागीदारी
सिजेरियन दर बढ़ने पर चिंता, स्किल ट्रेनिंग से घटेगी मातृ-शिशु मृत्यु दर

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |
सुरक्षित मातृत्व और सुरक्षित प्रसव को लेकर लखनऊ में आयोजित “आर्ट ऑफ बर्थिंग कॉन्क्लेव 2026” में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने एक मंच पर आकर मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की। आयोजन अध्यक्ष Dr Preeti Kumar ने बताया कि यह कॉन्क्लेव विशेष रूप से मिडवाइव्स और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
उन्होंने कहा कि कौशल-आधारित प्रशिक्षण, साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धतियों और वैश्विक अनुभवों के समन्वय से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। वहीं Dr Bhaskar Pal ने कहा कि Federation of Obstetric and Gynaecological Societies of India का मुख्य उद्देश्य हर प्रसव को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना है।
मुख्य अतिथि Amit Kumar Ghosh ने बताया कि सिजेरियन प्रसव की दर 20–25 प्रतिशत से बढ़कर 40–50 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसका प्रमुख कारण एनीमिया, मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी जटिलताएं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्ष्य प्रसव की संख्या घटाना नहीं, बल्कि हर प्रसव को सुरक्षित बनाना है।
आयोजन सचिव Dr Seema Mehrotra ने बताया कि कॉन्क्लेव में कार्यशालाओं और वैज्ञानिक सत्रों के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को प्रसव प्रबंधन, प्रसवोत्तर देखभाल और नवजात स्वास्थ्य के आधुनिक मानकों का प्रशिक्षण दिया गया। Dr Sujata Dev ने दाइयों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए सम्मानजनक मातृत्व देखभाल पर जोर दिया।
इस आयोजन में UNICEF, UNFPA India, Jhpiego और Laerdal Global Health जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सहयोग रहा।
कॉन्क्लेव में 500 से अधिक प्रतिभागियों—नर्सिंग अधिकारी, दाइयाँ और विशेषज्ञ—ने भाग लिया। स्किल स्टेशन के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रसवोत्तर रक्तस्राव नियंत्रण, नवजात पुनर्जीवन और सुरक्षित प्रसव तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने प्री-कंसेप्शन काउंसलिंग, एंटीनेटल केयर और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। यह कॉन्क्लेव मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।



