
: ₹1 लाख मदद नाकाफी, 1.5 लाख की मांग तेज
निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क (डीएफ हिंदी)
कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर आयोजित अनुदान वितरण समारोह में जहां सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनाईं, वहीं यात्रियों और समिति के पदाधिकारियों ने बढ़ती लागत के बीच दी जा रही सहायता राशि पर सवाल खड़े कर दिए। लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा ₹1 लाख की अनुदान राशि वितरित की गई, लेकिन इसे मौजूदा खर्च के मुकाबले अपर्याप्त बताया गया।
समिति अध्यक्ष के.के. सिंह ने खुलकर कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में यह सहायता पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुदान राशि को बढ़ाकर ₹1.5 लाख करने का अनुरोध किया। उनका तर्क साफ था—लिपुलेख मार्ग से यात्रा का खर्च ₹2.31 लाख से अधिक और नाथुला मार्ग से ₹3.35 लाख तक पहुंच चुका है। ऐसे में ₹1 लाख की मदद केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यात्रियों को सम्मानित करते हुए इसे आध्यात्मिक उपलब्धि बताया, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि कैलाश यात्रा अब आम श्रद्धालुओं की पहुंच से लगातार दूर होती जा रही है। खर्च में लगातार वृद्धि और सीमित सरकारी सहायता के कारण यह यात्रा केवल सक्षम वर्ग तक सिमटने का खतरा झेल रही है।
वरिष्ठ यात्री आनंदपाल सिंह निंबाड़िया ने कैलाश यात्रा के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया, लेकिन आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उतना ही गंभीर बना हुआ है। आंकड़ों के अनुसार 2025 में उत्तर प्रदेश के 555 यात्रियों में से केवल 84 ने सरकारी माध्यम से यात्रा की, जबकि 471 यात्रियों को निजी साधनों का सहारा लेना पड़ा—जो सरकारी व्यवस्था की सीमाओं को उजागर करता है।
समारोह में स्वागत और सम्मान के बीच यह मुद्दा बार-बार उभरता रहा कि अगर अनुदान राशि और व्यवस्थाएं नहीं बढ़ीं, तो भविष्य में आम श्रद्धालुओं की भागीदारी और घट सकती है।



