कानपुर में प्लास्टिक से बनेगी सड़कें, पहली बार 90 करोड़ की परियोजना शुरू

जर्मनी और स्वीडन जैसे देशों की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश के कानपुर में प्लास्टिक वेस्ट से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस दिशा में नगर निगम ने एक नई पहल करते हुए 90 करोड़ रुपये की लागत से 15 सड़कों को प्लास्टिक-बिटुमिन तकनीक से बनाने की योजना तैयार की है। शासन से इस परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है, और बहुत जल्द शहर की सड़कों पर यह प्रयोग धरातल पर नजर आएगा।
नगर निगम के अनुसार, पहले भी शहर में प्लास्टिक से सड़क बनाने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह प्रयोग असफल रहा था। इस बार आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरों की तकनीकी सहायता और विस्तृत अध्ययन के आधार पर परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई है। अध्ययन रिपोर्ट को शासन से स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण की तैयारी शुरू हो चुकी है।
नगर आयुक्त का दावा: पहली बार यूपी में यह प्रयोग
नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने बताया कि यह योजना 15वें वित्त आयोग के तहत लागू की जा रही है। सड़कों के निर्माण में घरों, दफ्तरों और संस्थानों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे का उपयोग होगा। नगर निगम का वेस्ट प्लांट पनकी में संचालित है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मीट्रिक टन कचरा पहुंचता है। इस प्लांट से प्राप्त प्लास्टिक को प्रोसेस कर सड़क निर्माण में उपयोग किया जाएगा। सड़क निर्माण में सात से आठ प्रतिशत तक प्लास्टिक और शेष हिस्सा बिटुमिन का होगा।
बारिश और भारी वाहनों से नहीं टूटेंगी सड़कें
आयुक्त के मुताबिक, पारंपरिक सड़कों की तुलना में प्लास्टिक मिश्रित सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन कहीं अधिक होगा। बारिश के कारण इन सड़कों के खराब होने की संभावना नहीं होती, और न ही भारी वाहनों की आवाजाही से ये जल्द टूटती हैं। इससे नगर निगम के रखरखाव खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
किन स्थानों पर बनेंगी ये सड़कें?
यह सड़कें शहर के सभी छह जोनों में बनाई जाएंगी। इनमें महफिल रेस्टोरेंट से फूलबाग चौराहा, शराब गद्दी से केडीए कॉलोनी होते हुए पाल चौराहा, लाल इमली से लकड़मंडी कूड़ा घर, भैरव घाट से मैगजीन घाट, अग्रवाल जनरल स्टोर से रामेश्वर मंदिर, कमिश्नर चौराहा से चांदनी नर्सिंग होम, शारदा नगर से माउंट कार्मेल स्कूल जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं।
कुल 15 सड़कों को इस तकनीक से बनाया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में इसका विस्तार किया जाएगा।



