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राष्ट्र निर्माण में लोककला और संस्कृति की भूमिका-जयवीर सिंह

उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश लोक कला आदान-प्रदान से सशक्त होगा राष्ट्र निर्माण

जनजातीय संग्रालय की 12वीं वर्षगांठ पर कलाकारों का सांस्कृतिक प्रदर्शन

बहुआयामी सहयोग से बढ़ेगा सामाजिक सौहार्द

निश्चय टाइम्स, लखनऊ। एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत 06 से 10 जून 2025 तक उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के बीच किये गये समझोता ज्ञापन के तहत उत्तर प्रदेश के लोक कलाकार मध्य प्रदेश भोपाल के जनजातीय संग्रालय की 12वीं वर्षगाँठ समारोह में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, इसी प्रकार मध्य प्रदेश के लोक कलाकार उत्तर प्रदेश में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इस अवसर पर प्रयागराज की सुश्री सुप्रिया सिंह रावत के नेतृत्व में कलाकारों का एक दल देढ़िया नृत्य 09 व 10 जून को करेंगा। इसी प्रकार मथुरा के मुराली लाल तिवारी के नेतृत्व में कलाकारों का दल 07 व 08 जून को चररकूला, मयूर नृत्य और होली रसिया जैसी प्रस्तुतियाँ देगा।
यह जानकारी आज यहाँ प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि इस संस्कृतिक आदान-प्रदान से भाषाई, एतिहासिक और समाजिक संबंधो को मजबूत बनाने के साथ-साथ सामाजिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि भारत जैसे बहुभाषिक, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में एक भारत श्रेष्ठ भारत जैसी पहल अत्यन्त जरूरी है, क्योंकि यह राष्ट्र की विविधिता के बीच सेतु का कार्य करती है। यह आयोजन इसी दिशा में एक प्रभावी कदम है, जिसके माध्यम से कला, संस्कृति लोक जीवन और सामाजिक संवाद को बढ़ाने में सफलता मिलेगी।
जयवीर सिंह ने बताया कि ‘‘हमारा उद्देश्य उत्तर प्रदेश की विविधतापूर्ण और समृद्ध लोक परंपराओं को देश के अन्य हिस्सों का प्रतीक माना जाता है। वहीं मयूर नृत्य राधा-कृष्ण की प्रेमगाथा को दर्शाते हुए मौर की नकल में प्रस्तुत किया जाता है। होली रसिया, होली के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत हैं, जिनमें ब्रज भाषा की में पहुंचाना है। इस प्रकार के आयोजन कलाकारों को न केवल नई पहचान देते हैं, बल्कि राज्यों के बीच सौहार्द और परस्पर सम्मान की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं। भोपाल का यह आयोजन एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे लोक कला और संस्कृति के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को बल दिया जा सकता है।’’
पर्यटन मंत्री ने बताया कि यह आयोजन भविष्य में और भी गहन सांस्कृतिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा। आने वाले समय में कार्यशालाओं, सांस्कृतिक मेलों, कलाकार आदान-प्रदान जैसे कार्यक्रमों और सांझा संकलनों का आयोजन प्रस्तावित है, जिससे एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान को और अधिक सशक्त किया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच इस प्रकार का पहला आयोजन अन्य राज्यों को भी प्रोत्साहित करेगा कि वे इस पहल का हिस्सा बनें।

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