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आरआरबी की चुनौतियाँ फिर चर्चा में, सुधारों पर मंथन

डिजिटल ढांचे और मानव संसाधन की कमी बनी बड़ी समस्या

ग्रामीण बैंक हमेशा उपलब्ध हों’—प्रणाली सुधार की जरूरत पर जोर

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क | डीएफ हिंदी

नई दिल्ली। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) की कार्यप्रणाली, तकनीकी ढांचे और सेवा क्षमता को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच Indian Banks’ Association ने नई दिल्ली में आरआरबी परिषद 2026 का आयोजन किया। “आरआरबी के लिए नेक्स्ट-जेन सुधार – चुनौतियाँ एवं अवसर” विषय पर आयोजित इस बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण बैंकिंग तंत्र अभी भी कई संरचनात्मक समस्याओं से जूझ रहा है।

परिषद का आयोजन Department of Financial Services के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव Ashish Madhavrao More, आईबीए के मुख्य कार्यकारी Atul Kumar Goel तथा National Bank for Agriculture and Rural Development के उप प्रबंध निदेशक Govardhan S Rawat सहित कई आरआरबी अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक के दौरान यह सामने आया कि ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल ढांचे का आधुनिकीकरण, मानव संसाधन क्षमता और ग्राहक सेवाओं की गुणवत्ता अभी भी गंभीर चुनौतियाँ बनी हुई हैं। कई विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीकी बदलाव की गति के मुकाबले आरआरबी की प्रणालियाँ धीमी हैं, जिससे ग्रामीण ग्राहकों को आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है।

वित्तीय सेवा विभाग के संयुक्त सचिव ने भी माना कि आरआरबी को अपनी सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना को तेजी से आधुनिक बनाना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को “ग्रामीण क्षेत्रों में हमेशा उपलब्ध बैंक” की मानसिकता के साथ काम करना होगा।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि ग्रामीण ग्राहकों के साथ संवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए स्थानीय भाषाओं में सेवाओं और संचार की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि ग्राहक प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत बनाया जाए ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

हालांकि परिषद का उद्देश्य सुधारों के रोडमैप पर चर्चा करना था, लेकिन चर्चाओं से यह भी स्पष्ट हुआ कि आरआरबी के सामने शासन व्यवस्था, तकनीकी अपनाने और संचालन क्षमता से जुड़ी कई चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। ऐसे में विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के साथ तालमेल बैठाने के लिए ग्रामीण बैंकिंग तंत्र में व्यापक सुधारों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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