संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर मस्जिद में मंदिर क्यों ढूंढा जाए। रामभद्राचार्य ने इस बयान को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि यह हिंदू धर्म की छवि के खिलाफ है।
रामभद्राचार्य की आपत्ति
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा, “संघ प्रमुख का यह बयान बेहद गैर जिम्मेदाराना है। मैं एक आचार्य हूं, और हिंदू धर्म के अनुशासन के लिए मेरी जिम्मेदारी है। यह बयान संघ की छवि को धूमिल कर सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि पहले संघ अलग था, लेकिन अब यह संगठन काफी बदल गया है।
रामभद्राचार्य ने कहा, “हम मंदिर की खोज नहीं कर रहे हैं। जहां जहां सर्वे के आधार पर मंदिर मिले हैं, हम वही मांग कर रहे हैं। मंदिर खोने की बात करना गलत है। हमने कोई पाप नहीं किया है। हम अपने अधिकार के लिए लड़ रहे हैं।”
संभल पर हुई टिप्पणियां
संभल में हुई पत्थरबाजी के मुद्दे पर रामभद्राचार्य ने कहा, “जब वहां सर्वे हुआ, तो हमने मंदिर के अधिकार की बात की। हमें उपद्रवियों द्वारा पत्थरबाजी का सामना करना पड़ा। हिंदुओं का पहले 30 हजार मंदिर तोड़ा गया था, जबकि हमने कभी किसी का मंदिर नहीं तोड़ा।”
उन्होंने आगे कहा, “जहां भी सर्वे में मंदिर मिलेगा, हम वहां अपना अधिकार जताएंगे। हम किसी को उकसा नहीं रहे हैं। हमें केवल आत्मरक्षा का अधिकार चाहिए। हिंदू समाज को भी अपनी सुरक्षा के लिए उठ खड़ा होना होगा। हमारे बहनों-बेटियों पर हुए अत्याचारों को देखते हुए हमें जागरूक रहना होगा।”
मुस्लिम समाज पर बयान
रामभद्राचार्य ने कहा, “मुस्लिम समाज को भी यह समझना चाहिए कि वे हिंदुओं का अस्तित्व मिटाने का प्रयास नहीं कर सकते। वे भी हमारे मंदिर हमें सौंप दें। हम उनके खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें हमारा हक चाहिए।”
आरएसएस के बदलते स्वरूप पर तंज
रामभद्राचार्य ने कहा, “आरएसएस बहुत बदल रहा है। हमने पहले संघ के कई प्रमुख देखे हैं। जब रज्जू भैया संघ प्रमुख थे, तब यह संगठन अलग था। लेकिन अब तुष्टिकरण की राजनीति के चलते आरएसएस अपनी दिशा भटक रहा है।” उन्होंने मोहन भागवत से भी आग्रह किया कि उन्हें इस प्रकार के बयान नहीं देने चाहिए।
रामभद्राचार्य का कहना है कि हिंदू समाज को अपनी आवाज बुलंद करनी होगी और अपने अधिकार के लिए संघर्ष जारी रखना होगा।