इंडियाधर्म

त्याग और अनुशासन ही देशभक्ति का आधार: सोनोवाल

निश्चय टाइम्स, डेस्क। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज के स्वर्ण जयंती उद्घाटन समारोह में भाग लिया। सोनोवाल ने आध्यात्मिकता, सामाजिक सद्भाव और चरित्र निर्माण पर आधारित संगठन की पचास वर्षों की निस्वार्थ सेवा की प्रशंसा की। अपने भाषण में सोनोवाल ने ब्रह्माकुमारीज़ को एक ” परिवर्तनकारी शक्ति ” बताया, जो ध्यान, मानवीय मूल्यों और आध्यात्मिक अनुशासन की शक्ति के माध्यम से समाज को नकारात्मकता से दूर कर नैतिकता की ओर ले जा रही है।
सोनोवाल ने कहा कि पिछले पचास वर्षों से प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ने न केवल व्यक्तिगत रूप से बल्कि हमारे समाज की आत्मा का भी पोषण किया है। उनकी अथक सेवा ‘ अंत्योदय ‘ के दृष्टिकोण को दर्शाती है – पंक्ति में अंतिम व्यक्ति का उत्थान – जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने शासन में बढ़ावा देते हैं। सोनोवाल ने कहा कि करुणा, चरित्र और हाशिए पर रहे लोगों के सशक्तिकरण से प्रेरित प्रधानमंत्री मोदी का समावेशी विकास का मॉडल ब्रह्माकुमारीज द्वारा अपनाए गए मूल्यों के साथ मेल खाता है। सोनोवाल कहा कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास केवल एक नारा नहीं है बल्कि यह एकता और उत्थान के प्रति एक आध्यात्मिक प्रतिबद्धता है।


उन्होंने कहा कि बलिदान, धैर्य और नैतिक शक्ति एक मजबूत राष्ट्र के आधार स्तंभ हैं। सोनोवाल ने मातृ सद्गुणों और राष्ट्रीय चरित्र के बीच समानताएं बताते हुए कहा की जिस तरह एक मां धैर्य और मूल्यों के साथ बच्चे का पालन पोषण करती है ठीक उसी तरह ब्रह्माकुमारी जैसे संगठन चरित्र, आत्म-अनुशासन और आत्म-साक्षात्कार का पोषण करके समाज को आकार देते है । उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि त्याग और अनुशासन पुराने जमाने के आदर्श नहीं हैं बल्कि बीते हुए कल के वो गुण हैं जो सच्ची देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की नींव रखते हैं। तेजी से हो रहे तकनीकी और सामाजिक बदलावों के बीच आज के युवाओं का मार्गदर्शन करने की जरूरत पर बल देते हुए सोनोवाल ने कहा कि आज की दुनिया में जहां धैर्य की परीक्षा होती है और मूल्यों को लगातार चुनौती दी जाती है, ऐसे में जिसके पास सहन शक्ति है, वही हमारी महाशक्ति है। सोनोवाल ने उन्हें इसमें शामिल करने के लिए संगठन के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण में पूर्वोत्तर के बढ़ते आध्यात्मिक और विकासात्मक महत्व को स्वीकार किया।
सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वोत्तर को अष्ट लक्ष्मी यानी समृद्धि के आठ अवतार बताया है और मेरा मानना ​​है कि यह क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास में बल्कि आध्यात्मिक और नैतिक नेतृत्व में भी अग्रणी रहेगा। सर्बानंद सोनोवाल ने चरित्र निर्माण, राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के उनके अटूट मिशन के लिए ब्रह्माकुमारीज़ की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अगर हम इन सिद्धांतों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ते हैं तो हम एक मजबूत, एकजुट और नैतिक रूप से सशक्त महा-भारत का निर्माण कर सकते हैं।

 

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