SAIL–RITES की बड़ी साझेदारी: डीजल लोकोमोटिव लीजिंग और मेंटेनेंस के लिए MoU, लॉजिस्टिक्स को मिलेगी रफ्तार
स्टील उत्पादन से रेल लॉजिस्टिक्स तक मजबूती: SAIL और RITES के बीच अहम समझौता

निश्चयट टाइम्स डेस्क। देश की महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और नवरत्न उपक्रम राइट्स लिमिटेड (RITES) ने डीजल लोकोमोटिव की लीजिंग एवं रखरखाव (मेंटेनेंस) के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य सेल के संयंत्रों और खदानों में लॉजिस्टिक्स दक्षता, परिचालन विश्वसनीयता और भविष्य की क्षमता विस्तार योजनाओं को सशक्त बनाना है।
सेल अपने स्टील प्लांट्स और माइंस में कच्चे माल की निर्बाध आवक, इन-प्रोसेस ट्रांसफर और तैयार उत्पादों के सुचारु आउट-बाउंड परिवहन के लिए एक समर्पित ‘मिनी रेल नेटवर्क’ का संचालन करता है। इस नेटवर्क के प्रभावी संचालन के लिए डीजल लोकोमोटिव बेड़े का बेहतर रखरखाव अत्यंत आवश्यक है, जिसमें वेट-लीज्ड (Wet Leased) लोकोमोटिव भी शामिल हैं।
भारतीय रेलवे जहां तेज़ी से इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की ओर संक्रमण कर रहा है, वहीं राइट्स लिमिटेड डीजल लोकोमोटिव के संचालन और रखरखाव में अपनी विशेषज्ञता बनाए हुए है। यही विशेषज्ञता सेल के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके कई संयंत्रों और खदानों में डीजल लोकोमोटिव अभी भी परिचालन की रीढ़ बने हुए हैं।
भारतीय रेलवे की अत्याधुनिक सुविधाओं, स्पेयर पार्ट्स की सुलभता और कुशल तकनीकी मानव संसाधन के व्यापक नेटवर्क तक पहुंच के कारण राइट्स, सेल की परिचालन आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम है। इस सहयोग से सेल को अपने रेल नेटवर्क में उच्च विश्वसनीयता, बेहतर मेंटेनेंस और लागत अनुकूलन का लाभ मिलेगा।
यह MoU दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को अपनी-अपनी मुख्य दक्षताओं पर फोकस करने, परिचालन लागत घटाने, लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करने और कार्बन फुटप्रिंट कम करने में भी सहायक सिद्ध होगा। इसके साथ ही, यह साझेदारी भारत के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के बीच सहयोग का एक मजबूत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।
इस समझौता ज्ञापन पर सेल की ओर से कार्यपालक निदेशक (प्रचालन) पी.के. बैसाखिया और राइट्स की ओर से कार्यपालक निदेशक (तकनीकी सेवाएं) संदीप जैन ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
यह रणनीतिक करार न केवल सेल की स्टील उत्पादन श्रृंखला को अधिक कुशल बनाएगा, बल्कि रेलवे-आधारित औद्योगिक लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी एक नई दिशा तय करेगा।



