हरिद्वार

इस्लामी जिहादियों के खात्मे के लिए संतों ने शुरू किया महायज्ञ

हरिद्वार। हरिद्वार के संतों ने ‘‘इस्लामी जिहादियों’’ के विनाश के लिए बृहस्पतिवार को श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के भैरव घाट पर मां बगलामुखी का ‘महायज्ञ’ शुरू किया। यज्ञ का आयोजन विवादित डासना पुजारी एवं जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि द्वारा किया जा रहा है जो ‘‘मुसलमानों के खिलाफ घृणा पैदा करने वाले भाषणों’’ के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस यज्ञ का आयोजन संतों द्वारा किया गया था, उनका उद्देश्य देश में बढ़ते आतंकवाद और जिहादी गतिविधियों के खिलाफ एक धार्मिक संघर्ष को शक्ति प्रदान करना है।

संतों का कहना था कि यह यज्ञ भारत की संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए किया जा रहा है, ताकि देश में आतंकवाद, जिहाद और धार्मिक असहिष्णुता को खत्म किया जा सके। यज्ञ के आयोजकों ने इसे एक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में पेश किया, जिसमें धर्म, समाज और देश की सुरक्षा की कामना की जा रही थी। हालांकि, इस तरह के आयोजन और उसकी बातों पर कई लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

समाज के कई वर्गों, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के समर्थकों ने इस आयोजन की आलोचना की है। उनका कहना था कि यह आयोजन न केवल असंवेदनशील और भड़काऊ था, बल्कि समाज में सांप्रदायिक दरार डालने का एक प्रयास भी था। उन्हें यह भी चिंता थी कि इस प्रकार के आयोजनों से धार्मिक सौहार्द्र को नुकसान पहुँच सकता है और समाज में तनाव बढ़ सकता है।

राजनीतिक नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने इसे संविधान और देश की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताया, जबकि अन्य ने इसे स्वतंत्रता के नाम पर उचित बताया। यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील बन गया क्योंकि समाज में पहले से ही धार्मिक असहिष्णुता और भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं।

संतों द्वारा किए गए इस महायज्ञ के आयोजन ने एक गंभीर प्रश्न उठाया है कि क्या धार्मिक अनुष्ठान या कार्यक्रमों का इस प्रकार का उपयोग समाज को बांटने या किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए किया जाना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप समाज में तात्कालिक रूप से तनाव बढ़ा, लेकिन इसके दूरगामी प्रभावों का आकलन करना अभी बाकी है।

यज्ञ का समापन 21 दिसंबर को होगा। यति नरसिंहानंद ने कहा कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत में हिंदुओं की हत्या करने वाले इस्लामी जिहादियों के पूर्ण विनाश के बिना ‘‘मानवता’’ की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने सनातन धर्म के अनुयायियों को महायज्ञ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। विश्व धर्म संसद की मुख्य संयोजक उदिता त्यागी और जूना अखाड़े के कोठारी श्रीमहंत महाकाल गिरि ने महायज्ञ में भाग लिया।

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