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बजट लैप्स पर सख्ती, अधिकारियों की सैलरी कटौती की चेतावनी

2: 64% खर्च पर ही अटका कृषि विभाग, जवाबदेही पर बड़ा सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क (DF हिंदी)

लखनऊ में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कृषि योजनाओं की धीमी प्रगति और बजट उपयोग की स्थिति ने प्रशासनिक ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया। सूर्य प्रताप शाही ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ चेतावनी दी कि अगर बजट लैप्स हुआ, तो संबंधित अधिकारियों के वेतन से इसकी भरपाई की जाएगी।

बैठक में सामने आए आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 8620.65 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले अब तक केवल 5560.96 करोड़ रुपये यानी करीब 64.51% ही खर्च हो पाया है। यह स्थिति तब है जब वित्तीय वर्ष खत्म होने में बेहद कम समय बचा है। सवाल उठता है कि पूरे साल योजनाएं कागजों में क्यों अटकी रहीं और अंतिम समय में अचानक खर्च बढ़ाने की हड़बड़ी क्यों दिखाई दे रही है।

कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने भी बीज वितरण और योजनाओं की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। खासतौर पर पीएम-कुसुम योजना, सोलर पंप, और कृषि यंत्रों के सत्यापन में देरी को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई गई।

बैठक में यह भी सामने आया कि कई योजनाओं में अवशेष बिल लंबित हैं और भुगतान प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाई है। डिजिटल क्रॉप सर्वे, एनएफएसएम और अन्य योजनाओं के तहत कार्यों की गति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चेतावनियां यह दर्शाती हैं कि सिस्टम में समय पर योजना क्रियान्वयन की कमी है। अगर पूरे साल निगरानी मजबूत होती, तो अंतिम समय में इस तरह की सख्ती की जरूरत नहीं पड़ती।

अब देखना होगा कि यह सख्त चेतावनी जमीनी स्तर पर असर दिखाती है या फिर हर साल की तरह फाइलों में ही सिमट कर रह जाती है।

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