शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर हुए विवाद और उसके बाद भड़की हिंसा ने संभल को गहरे जख्म दिए हैं। 24 नवंबर को हुई पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 लोग घायल हुए। व्यापारियों के सपने अफवाहों की आग में जलकर राख हो गए हैं, और शहर के बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
मस्जिद के सर्वे से शुरू हुआ विवाद
19 नवंबर को संभल की एक अदालत ने शाही जामा मस्जिद का सर्वे कराने का आदेश दिया था। याचिका में दावा किया गया था कि मस्जिद के स्थान पर पहले हरिहर मंदिर था, जिसे 1526 में मुगल शासक बाबर ने ध्वस्त कर मस्जिद बनवाई थी। इस आदेश के बाद 24 नवंबर को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिससे हिंसा भड़क उठी।

हिंसा में व्यापार हुआ प्रभावित
हिंसा के कारण सबसे अधिक नुकसान व्यापारियों को हुआ है। स्पेयर पार्ट्स व्यापारी मशहाद हुसैन ने बताया, “पिछले कई दिनों से व्यापार पूरी तरह बंद है। लोग आते हैं, लेकिन कुछ खरीदते नहीं।” वहीं, सर्राफा व्यापारी अजय कुमार गुप्ता ने कहा, “शादी का सीजन होते हुए भी चार दिनों में केवल तीन ग्राहक आए। करोड़ों का नुकसान हो चुका है।”
सुरक्षा के सख्त इंतजाम
हिंसा के बाद पुलिस प्रशासन ने शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी है। मस्जिद के आसपास सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है। मस्जिद समिति के प्रमुख जफर अली ने कहा, “हमने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है, और नमाज शांति से पूरी हुई। आगे भी शांति कायम रखने का प्रयास करेंगे।”

सुप्रीम कोर्ट का आदेश
मस्जिद समिति ने सर्वे के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अस्थायी रोक लगाई है और उत्तर प्रदेश सरकार को शांति और सद्भाव बनाए रखने का निर्देश दिया है।
स्थानीय निवासियों की अपील
स्थानीय शिक्षक विकास वर्मा ने कहा, “संभल के लोग इन घटनाओं से बेहद दुखी हैं। अब हम सब मिलकर शांति और प्रगति की ओर बढ़ने की कोशिश करेंगे। हमें उम्मीद है कि संभल जल्द ही अपने पुराने रूप में लौटेगा।”

प्रशासन का भरोसा
जिला प्रशासन और पुलिस हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। संभल के लोग शांति और सामान्य स्थिति की वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। हिंसा के बाद उपजे तनाव को कम करने के लिए प्रशासन हर संभव कदम उठा रहा है।
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