पिछले दिनों हुई हिंसा के बाद संभल में सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जिले में पुलिस के बड़े अधिकारियों को तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है, और पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
सुरक्षा के खास इंतजाम:
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सुरक्षा बलों की तैनाती: 15 कंपनियां पीएसी, 2 कंपनियां आरएएफ, 10 जिलों की पुलिस और महिला पुलिस बल सक्रिय।
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दंगा निरोधी दस्ते: विशेष निगरानी के लिए तैनात।
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तकनीकी निगरानी: ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से हर संवेदनशील क्षेत्र पर नजर।
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पुलिसकर्मी बॉडी कैमरों के साथ तैनात।
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धारा 144 लागू: चार से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी।
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इंटरनेट सेवाएं अस्थाई रूप से बंद।
जामा मस्जिद पर खास प्रबंधन:
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मस्जिद के बाहर नमाज की अनुमति नहीं, केवल अंदर इबादत की अनुमति।
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केवल स्थानीय लोगों को प्रवेश की अनुमति।
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सभी प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर और छतों पर पुलिसकर्मी तैनात।
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50 से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया।
अदालती सर्वे और विवाद:
संभल की अदालत ने शाही जामा मस्जिद का सर्वे रिपोर्ट 29 नवंबर तक पेश करने का निर्देश दिया था। 19 और 24 नवंबर को सर्वे हुआ, लेकिन वकीलों की हड़ताल के कारण आज अदालत में रिपोर्ट पेश होने की संभावना नहीं है।
हिंसा पर न्यायिक जांच के आदेश:
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हिंसा की न्यायिक जांच के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है।
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समिति में सेवानिवृत्त आईएएस अमित मोहन प्रसाद और पूर्व आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन शामिल हैं।
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यह समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:
संभल की शाही जामा मस्जिद पर हुए सर्वे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी। 19 नवंबर को जिला अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई है, जिसमें इस आदेश को चुनौती दी गई है।
मुरादाबाद के कमिश्नर आंजनेय सिंह ने बताया कि पुलिस को पहले से इनपुट था कि संभल में दंगा हो सकता है। उसी आधार पर फोर्स तैनात की गई थी।
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