कानपुर: बांग्लादेश के सीनियर ऑलराउंडर शाकिब अल हसन ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। साथ ही, उन्होंने अगले महीने मीरपुर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली घरेलू सीरीज के अंत में टेस्ट क्रिकेट से भी संन्यास लेने की इच्छा व्यक्त की है। 37 वर्षीय शाकिब ने गुरुवार को कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में भारत के खिलाफ अपनी टीम के दूसरे टेस्ट से पहले यह घोषणा की।
नए खिलाड़ियों को आगे लाने का समय
शाकिब ने संवाददाताओं से कहा, “नए खिलाड़ियों को लाने का यह सही समय है। टी20 अंतरराष्ट्रीय के लिए भी यही सही है। मैंने मुख्य चयनकर्ता और बीसीबी अध्यक्ष से बात की है और हम सभी को लगा कि यह आगे बढ़ने और नए खिलाड़ियों को मौका देने का सही समय है।”
टी20 करियर की उपलब्धियाँ
शाकिब, जो 2007 में उद्घाटन संस्करण के बाद से हर टी20 विश्व कप में मौजूद रहे हैं, ने 129 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने 121.18 की स्ट्राइक रेट से 2,551 रन बनाए और गेंदबाजी में 149 विकेट हासिल किए।
टेस्ट क्रिकेट से विदाई की योजना
शाकिब ने खुलासा किया कि वह ढाका के मीरपुर में प्रतिष्ठित शेरे बांग्ला नेशनल स्टेडियम में घरेलू दर्शकों के सामने अपना अंतिम टेस्ट मैच खेलना चाहते हैं। हालांकि, सुरक्षा चिंताओं के चलते वह अपनी यह इच्छा पूरी नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा, “अगर मीरपुर में ऐसा नहीं होता है, तो भारत के खिलाफ दूसरा टेस्ट मेरा आखिरी टेस्ट होगा।”
टेस्ट करियर की उपलब्धियाँ
शाकिब ने 2007 में चटगाँव में भारत के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया और तब से बांग्लादेश के लिए 70 टेस्ट मैच खेले। उन्होंने 4,600 रन बनाए, जिसमें पांच शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं, जिससे वह बांग्लादेश के टेस्ट इतिहास में तीसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। इसके अलावा, शाकिब टेस्ट क्रिकेट में 242 विकेट लेकर बांग्लादेश के सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ भी हैं।
भविष्य की योजनाएँ
शाकिब ने अपनी योजना की पुष्टि की है कि वह 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद वनडे क्रिकेट से भी संन्यास लेंगे। 17 वर्षों से अधिक के करियर में, शाकिब ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चैंपियंस ट्रॉफी में खेलने के बाद वह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से विदाई लेंगे।
शाकिब अल हसन का करियर न केवल उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिए जाना जाएगा, बल्कि उन्होंने बांग्लादेश क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी विदाई क्रिकेट जगत के लिए एक युग के अंत का प्रतीक है।