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एसजीबी निवेशकों को झटका: समय से पहले मोचन पर सोने के बाजार भाव से कम कीमत, भरोसे पर सवाल

निश्चय टाइम्स डेस्क।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना के तहत निवेश करने वाले निवेशकों को एक बार फिर निराशा का सामना करना पड़ा है। भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार एसजीबी 2019-20 श्रृंखला-VIII के लिए 21 जनवरी 2026 को समय से पहले मोचन की अनुमति दी गई है, लेकिन इसका मोचन मूल्य ₹14,432 प्रति इकाई तय किया गया है, जिसे कई निवेशक मौजूदा बाजार परिस्थितियों के अनुरूप नहीं मान रहे हैं।

यह मोचन मूल्य इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के 16, 19 और 20 जनवरी 2026 के समापन मूल्यों के साधारण औसत के आधार पर निर्धारित किया गया है। हालांकि, निवेशकों का कहना है कि खुले बाजार में सोने की कीमतें इससे कहीं अधिक स्तर पर बनी हुई हैं, ऐसे में एसजीबी धारकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि जब भौतिक बाजार में सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, तब सरकारी बॉन्ड के मोचन मूल्य का इससे पीछे रह जाना एसजीबी योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। कई निवेशकों को उम्मीद थी कि समय से पहले मोचन पर उन्हें बाजार के बराबर या उसके आसपास का मूल्य मिलेगा, लेकिन घोषित राशि ने इन उम्मीदों को झटका दिया है।

आलोचकों का कहना है कि एसजीबी योजना को भौतिक सोने के विकल्प के रूप में प्रचारित किया गया था, लेकिन वास्तविकता में मोचन के समय कीमतों का निर्धारण निवेशकों के हितों के बजाय तकनीकी फार्मूले तक सीमित दिख रहा है। इससे खासकर मध्यम वर्ग और दीर्घकालिक बचत करने वाले निवेशकों में असंतोष बढ़ रहा है।

इसके अलावा, यह सवाल भी उठ रहा है कि जब सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू सर्राफा बाजार में तेज़ी से बढ़ रही हैं, तब तीन कारोबारी दिनों के औसत मूल्य के आधार पर मोचन तय करना निवेशकों के साथ न्यायसंगत है या नहीं। निवेशकों का कहना है कि इससे कीमतों में अचानक आई तेजी का लाभ उन्हें नहीं मिल पाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी स्थिति बनी रही, तो भविष्य में एसजीबी योजना में निवेश को लेकर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है और वे दोबारा भौतिक सोने या अन्य निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। सरकार से मांग की जा रही है कि मोचन मूल्य निर्धारण के फार्मूले की समीक्षा की जाए, ताकि निवेशकों को वास्तविक बाजार मूल्य के करीब लाभ मिल सके।

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