देवरिया का सोहनाग धाम जहां,मिथिला से लौटते वक्त भगवान परशुराम ने किया था रात्रि विश्राम और तप

रिपोर्ट-संजय मिश्र।
निश्चय टाइम्स, देवरिया।
बेद,पुराणों और रामायण आदि ग्रंथों में जिक्र की गई एक ऐसी दिव्य स्थली जो आज भी हमारे इस पवित्र भूमि पर विद्यमान है। हम आपको एक ऐसे पौराणिक स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं।जो अपने – आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है। जहां मिले हैं अवशेष भगवान परशुराम के होने का। एक ऐसा चमत्कारी सरोवर जो सभी प्रकार के चर्म रोग का जड़ से निवारण करता है।
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला मुख्यालय से करीबन 34 किलोमीटर दूर सलेमपुर तहसील क्षेत का सोहनाग कस्बा परशुराम धाम के नाम से प्रसिद्ध है। यहां भगवान परशुराम ने मिथिला (जनकपुर))से लौटते समय रात्रि में विश्राम किया और काफी दिनों तक तप – साधना किया था।तभी से इस स्थान का धार्मिक व पौराणिक महत्व बढ़ गया। परशुराम जयंती (अक्षय तृतीया) के दिन भव्य मेले तथा विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।यहां प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीस गढ़ के अलावा नेपाल से भी लोग आते हैं।
सोहनाग धाम की कथा भगवान परशुराम से जुड़ी है। ऐसा बताया जाता है कि यहां घना जंगल हुआ करता था।जब त्रेता युग में धनुष यज्ञ के दौरान भगवान श्रीराम ने शिव धनुष तोड़ा तो टूटने की आवाज सुन कर भगवान परशुराम वायु मार्ग से पहुंच गए। जनकपुर में लक्ष्मण-परशुराम संवाद हुआ।कहते है कि जनकपुर से लौटते समय सोहनाग आते -आते रात होने लगीं।उस समय यहां घनघोर जंगल था।जंगल और प्राकृतिक छटा – दृश्य को देख कर वह आकर्षित हुए।उसके बाद रात्रि विश्राम किया।स्थान मनोरम होने के कारण काफी दिनों तक सोहनाग के जंगल में रह कर तप -साधना किया।

सरोवर में स्नान मात्र से ठीक हो जाते हैं चर्मरोग।
सोहनाग भगवान परशुराम के बगल में ठीक पूरब दिशा में तकरीबन दस एकड़ भूमि में एक पवित्र सरोवर फैला हुआ है।जिसका धार्मिकता के साथ बैज्ञानिक महत्व है। जनश्रुति के अनुसार बताते है कि कई सौ बर्ष पूर्व नेपाल के राजा सोहन, धर्माचार्यों के निर्देश पर तीर्थाटन के लिए निकले।जो चर्म रोग रोग से पीड़ित थे।काफी भ्रमण के बाद जब यहां पहुंचे तो मनभावन जगह होने की वजह से उन्होंने रात्रि में विश्राम किया।सुबह उठ कर जल का स्पर्श किया तो उनका चर्म रोग कुछ कम होने लगा। चर्म रोग कम होता देख राजा को आश्चर्य का ठिकाना नही रहा।राजा यही रुक गए और सरोवर में रोज स्नान करने लगे।रोज स्नान करने से पूर्ण रूप से चर्म रोग ठीक हो गया। इससे प्रभावित हो कर खुदाई कराई कि रहस्य क्या है?खुदाई कराई गई जिसमें से भगवान परशुराम,माता रेणुका,पिता जमदग्नि और भगवान बिष्णु की पत्थर की बेशकीमती मूर्ति निकाली।राजा सोहन ने इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया और मंदिर में इन मूर्तियों का प्राण प्रतिष्ठा कराया।तभी से राजा सोहन के नाम पर इस जगह का सोहनाग पड़ा।
पर्यटन विभाग की तरफ से सरोवर पर इंटर लॉकिंग रास्ता बनाई गई है।पर्यटन विभाग द्वारा बहुद्देशीय भवन का निर्माण कराया गया है।


