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विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देने हेतु IICA और नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल के बीच रणनीतिक मंथन

प्रशिक्षण, अनुसंधान, उत्पादकता, स्थिरता और अनुपालन के क्षेत्रों में संभावित साझेदारी पर हुई उच्चस्तरीय बैठक

निश्चय टाइम्स डेस्क।

भारत को उच्च आय, प्रतिस्पर्धी और सतत अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (IICA) और नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC) के बीच रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस क्रम में एनपीसी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आईआईसीए का दौरा किया।

एनपीसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व महानिदेशक नीरजा शेखर तथा उप महानिदेशक (ग्रुप) उमाशंकर प्रसाद ने किया। बैठक का उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुसंधान, उत्पादकता, स्थिरता, ईएसजी और अनुपालन सहयोग जैसे उभरते क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं की खोज करना रहा।

प्रतिनिधिमंडल का स्वागत आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने किया तथा अतिथियों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उद्योग और शासन की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप संस्थानों को निरंतर स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखना होगा। उन्होंने “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संस्थागत सहयोग को समय की आवश्यकता बताया।

श्री सिंह ने कहा कि शासन, उत्पादकता, स्थिरता और नवाचार जैसी जटिल चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब नीति अनुसंधान, प्रशिक्षण और कार्यान्वयन एजेंसियां मिलकर कार्य करें। इस अवसर पर आईआईसीए के विभिन्न स्कूलों और केंद्रों के प्रमुखों ने शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, एडवोकेसी और परामर्श सेवाओं के माध्यम से सरकार और निजी क्षेत्र को दिए जा रहे सहयोग पर प्रस्तुतियां दीं।

एनपीसी की महानिदेशक नीरजा शेखर ने अपने संबोधन में बताया कि एनपीसी की स्थापना वर्ष 1958 में हुई थी, जब देश सीमित संसाधनों के साथ उत्पादकता बढ़ाने की चुनौती से जूझ रहा था। उन्होंने जापान की उत्पादकता यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि एनपीसी ने उद्योग के साथ-साथ कृषि, सेवा क्षेत्र, एमएसएमई, हरित उत्पादकता और ईएसजी आधारित पहलों में भी अपनी भूमिका का विस्तार किया है।

उन्होंने एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए पर्यावरण ऑडिट, ऊर्जा एवं जल प्रबंधन, बीआरएसआर रिपोर्टिंग और ईएसजी परामर्श में एनपीसी की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

बैठक के अंत में दोनों संस्थानों ने यह संकल्प व्यक्त किया कि आईआईसीए की नीति एवं प्रशिक्षण क्षमता को एनपीसी की व्यावहारिक उत्पादकता विशेषज्ञता के साथ जोड़कर देश को नवोन्मेषी, प्रतिस्पर्धी और सतत अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया जाएगा। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नवीन सिरोही, प्रमुख – स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड मैनेजमेंट, आईआईसीए द्वारा किया गया।

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