तीसरी तिमाही में निजी कॉरपोरेट सेक्टर की दमदार वापसी, 10.1% की दो अंकों वाली बिक्री वृद्धि दर्ज
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ग्रोथ का इंजन, ऑटो और इलेक्ट्रिकल उद्योगों ने पकड़ी रफ्तार

📰 निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | डी.एफ. हिंदी
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) में निजी कॉरपोरेट कारोबारी क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन किया है। 3,188 सूचीबद्ध गैर-सरकारी, गैर-वित्तीय कंपनियों के तिमाही नतीजों पर आधारित रिपोर्ट में सामने आया है कि इस अवधि में कुल बिक्री वृद्धि 10.1 प्रतिशत (साल-दर-साल) रही, जो पिछले 11 तिमाहियों के एकल अंक की वृद्धि के बाद बड़ा सुधार है।
इस तेज़ी की सबसे बड़ी वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर रहा, जहां 1,794 कंपनियों की बिक्री में 11.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। खासकर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और नॉन-फेरस मेटल उद्योगों ने मजबूत प्रदर्शन किया। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों की बिक्री वृद्धि भी बढ़कर 8.8 प्रतिशत हो गई, जबकि गैर-आईटी सेवा कंपनियों की वृद्धि 10.6 प्रतिशत पर स्थिर रही।
हालांकि, कच्चे माल की लागत में 12.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कंपनियों पर इनपुट कॉस्ट का दबाव बढ़ा। रॉ मैटेरियल टू सेल्स रेशियो 55.9 प्रतिशत से बढ़कर 57.5 प्रतिशत हो गया, जो लागत दबाव का संकेत देता है। स्टाफ लागत में भी मैन्युफैक्चरिंग और आईटी सेक्टर में तेजी आई, जबकि गैर-आईटी सेवाओं में थोड़ी नरमी रही।
इसके बावजूद ऑपरेटिंग प्रॉफिट में मजबूती देखने को मिली। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का परिचालन लाभ 11.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि आईटी कंपनियों में यह वृद्धि 11.1 प्रतिशत रही। हालांकि गैर-आईटी सेवा क्षेत्र में लाभ वृद्धि घटकर 4 प्रतिशत रह गई।
एक सकारात्मक संकेत यह भी रहा कि ब्याज खर्च में कमी के चलते मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 8.6 से बढ़कर 9.0 हो गया। इससे कंपनियों की कर्ज चुकाने की क्षमता मजबूत हुई है।
कुल मिलाकर, तीसरी तिमाही के आंकड़े संकेत देते हैं कि निजी कॉरपोरेट क्षेत्र में मांग और उत्पादन गतिविधियों में सुधार हो रहा है, हालांकि लागत दबाव और मार्जिन पर असर जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।



