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सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर के राज्यों से कूड़ा प्रबंधन पर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कूड़ा प्रबंधन की बदहाल स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग करना पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है।

स्मार्ट सिटी में ठोस कूड़ा प्रबंधन अनिवार्य

जस्टिस अभय एस. ओका और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन ठोस कूड़ा प्रबंधन नियमों का पालन किए बिना शहरों को स्मार्ट कैसे बनाया जा सकता है? कोर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए एनसीआर राज्यों से मार्च के अंत तक हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

कचरे से बिजली परियोजनाओं पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने एनसीआर में ठोस कूड़ा प्रबंधन की खामियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि अगर कचरे को सही तरीके से अलग नहीं किया गया तो कचरे से बिजली बनाने वाली परियोजनाएं और अधिक प्रदूषण फैलाएंगी। इस पर कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव पर रिपोर्ट मांगी है।

दिल्ली में 3000 टन कूड़ा बिना निस्तारण के रह जाता है

कोर्ट ने दिल्ली सरकार और नगर निगम की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि राजधानी में हर दिन करीब 3000 टन कूड़ा बिना प्रबंधन के पड़ा रह जाता है। यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही ठोस कूड़ा प्रबंधन को लेकर कदम नहीं उठाए गए, तो निर्माण कार्यों पर रोक लगानी पड़ सकती है।

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