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करनाल के लाल लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की शहादत से देश ग़मगीन, पत्नी की विदाई ने रुला दिया

पूरे देश को झकझोर देने वाली कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की शहादत की खबर ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। करनाल निवासी विनय की 16 अप्रैल को शादी हुई थी और वे अपनी पत्नी हिमांशी के साथ हनीमून के लिए पहलगाम गए थे। लेकिन आतंकियों की कायराना हरकत ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।

हमले में गोली लगने से विनय गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी हिमांशी भी हमले में घायल हुईं। जब विनय का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो पत्नी हिमांशी ताबूत से लिपटकर बिलख उठीं। उन्होंने कहा, “हमें आप पर हमेशा गर्व रहेगा… जय हिंद!” यह दृश्य देखकर हर किसी की आंखें भर आईं।

परिजनों के अनुसार, शादी के बाद विनय और हिमांशी यूरोप घूमने का प्लान बना रहे थे लेकिन वीजा न मिलने के कारण उन्होंने कश्मीर जाने का निर्णय लिया। लेकिन यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी बन गया। परिवार के लोगों ने दादा-दादी को यह मनहूस खबर सुबह दी। जब उन्हें पता चला कि उनका पौता अब नहीं रहा, तो उनकी चीखें सुन आस-पास के लोग भी सिहर उठे।

विनय मूल रूप से करनाल के भूसली गांव के रहने वाले थे। उन्होंने तीन साल पहले भारतीय नौसेना में भर्ती होकर देशसेवा की शुरुआत की थी। उनके पिता राजेंद्र नरवाल केंद्र सरकार के कस्टम विभाग में हैं और दादा हवा सिंह हरियाणा पुलिस से सेवानिवृत्त हैं। विनय की मां आशा और बहन सृष्टि इस खबर को सुनकर बेसुध हो गईं।

विनय और हिमांशी की डेस्टिनेशन वेडिंग मसूरी में हुई थी। शादी के बाद 19 अप्रैल को रिसेप्शन आयोजित किया गया था। 1 मई को विनय का जन्मदिन था और 3 मई को उन्हें कोच्चि में ड्यूटी पर वापस लौटना था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

हमले के बाद वायरल हुए एक वीडियो में विनय घायल अवस्था में जमीन पर पड़े दिख रहे हैं और पास में बैठी हिमांशी रो रही हैं। यह तस्वीर देशभर के लोगों के दिल को चीर गई। घर के बाहर रातभर सैकड़ों लोग शोक संवेदना प्रकट करने पहुंचे। देश ने अपना एक बहादुर सपूत खो दिया।

अब पूरा देश यही सवाल कर रहा है—कब मिलेगा इन शहीदों के खून का जवाब? सरकार ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, लेकिन जनता अब ठोस और निर्णायक कदम की प्रतीक्षा कर रही है।

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